इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। यह पावन अवसर भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
हे नाथ नारायण…॥
पितु मात स्वामी, सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
हे नाथ नारायण…॥
॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी…॥
बंदी गृह के, तुम अवतारी
कही जन्मे, कही पले मुरारी
किसी के जाये, किसी के कहाये
है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥
है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥
गोकुल में चमके, मथुरा के तारे
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
पितु मात स्वामी, सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे
बट गए दोनों में, आधे आधे
हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल
सदैव भक्तों के, काम साधे ॥
सदैव भक्तों के, काम साधे ॥
वही गए वही, गए वही गए
जहाँ गए पुकारे
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
पितु मात स्वामी सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
गीता में उपदेश सुनाया
धर्म युद्ध को धर्म बताया
कर्म तू कर मत रख फल की इच्छा
यह सन्देश तुम्ही से पाया
अमर है गीता के बोल सारे
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
पितु मात स्वामी सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बंधू सखा त्वमेव
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देव देवा
॥ श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी…॥
राधे कृष्णा राधे कृष्णा
राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥
राधे कृष्णा राधे कृष्णा
राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥
हरी बोल, हरी बोल,
हरी बोल, हरी बोल ॥
राधे कृष्णा राधे कृष्णा
राधे राधे कृष्णा कृष्णा
राधे कृष्णा राधे कृष्णा
राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥
Krishna Janmashtami 2025: जन्माष्टमी पर इन राशि वालों के बनेंगे बिगड़े काम
कन्या राशि
इस समय आपके जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं। विवाह के अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं और व्यापार में नई डील होने की संभावना भी है। खासतौर पर तकनीकी, विज्ञापन, परामर्श या नवाचार के क्षेत्र से जुड़े लोगों को आगे बढ़ने के नए मौके मिलेंगे। कामकाज में सीनियर्स की सराहना मिलेगी और प्रमोशन का भी योग बन सकता है। साथ ही, यात्रा और व्यापार के जरिए लाभ मिलने की संभावना है।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और कारोबार में सफलता लेकर आ सकता है। आपकी मेहनत रंग लाएगी और उन्नति के अवसर मिलेंगे। संतान सुख से मन प्रसन्न रहेगा। बिजनेस में मनचाहा लाभ मिलने की संभावना है और नए संपर्कों से व्यापार विस्तार भी संभव है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों को जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है। पारिवारिक जीवन में खासकर माता से संबंध और प्रगाढ़ होंगे। छात्रों के लिए यह समय पढ़ाई में सफलता और नई चीजें सीखने का अच्छा मौका लेकर आया है। संतान से किया वादा पूरा हो सकता है। जीवनसाथी, मित्र या बिजनेस पार्टनर का सहयोग मिलने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। करियर में नई योजनाओं पर काम शुरू करने का यह उपयुक्त समय है।
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें ये विशेष भोग
माखन-मिश्री
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में माखन और मिश्री का विशेष स्थान है। वे बचपन में चुपचाप घर-घर जाकर माखन चुराते थे, इसी वजह से माखन-मिश्री का भोग उन्हें अत्यंत प्रिय है। जन्माष्टमी के दिन इसका भोग लगाने से श्रीकृष्ण की विशेष कृपा मानी जाती है।
पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करना और इसे भोग स्वरूप अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
पंजीरीधार्मिक पर्वों जैसे जन्माष्टमी और राम नवमी पर पंजीरी का भोग लगाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख प्रसादों में से एक है और इसे श्रद्धा से अर्पित करने पर विशेष फल मिलता है।
लौकी या खोए का पाग
जन्माष्टमी पर कई लोग लौकी, खोया, तिल या मूंगफली से बनी हुई विशेष मिठाई (जिसे पाग कहा जाता है) का भोग भी लगाते हैं। यह मिठाई भक्ति और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है और इसे प्रसाद रूप में बांटना भी पुण्यदायी होता है।
श्री कृष्ण चालीसा
जय यदुनन्दन जगवन्दन, जय वसुदेव देवकी नन्दन।
जय यशोदा सुत नन्द दुलारे, जय प्रभु भक्तन के दृग तारे।
जय नटनागर नाग नथड्या, कृष्ण कन्हैया धेनु चरड्या।
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो, आओ दीनन कष्ट निवारो।
वंशी मधुर अधर धरि टेरी, होवे पूर्ण विनय यह मेरी।
आओ हरि पुनि माखन चाखो, आज लाज भारत की राखो ।
गोल कपोल चिबुक अरुणारे, मुस्कान, मोहिनी डारे। मृदु
रंजित राजिव नयन विशाला, मुकुट बैजन्ती माला। मोर
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे, कटि किंकणी काछन काछे।
नील जलज सुन्दर तनु सोहै, छवि लखि सुर नर मुनि मन मोहै।
मस्तक तिलक अलक घुंघराले, आओ कृष्ण बांसुरी वाले।
करि पय पान, पूतनहिं तारयो, अका बका कागा सुर मारयो।
मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला, भये शीतल, लखितहिं नन्दल
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो, गोवर्धन नखधारि बचायो ।
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई, मुख मुंह चौदह भुवन दिखाई।
दुष्ट कंस अति उधम मचायो, कोटि कमल जब फूल मंगायो।
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें, चरणचिन्ह दे निर्भय कीन्हैं।
करि गोपिन संग रास विलासा, सबकी पूरण करि अभिलाषा।
केतिक महा असुर संहारियो, कंसहि केस पकड़ि दै मारयो।
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई, उग्रसेन कहं राज दिलाई।
महि से मृतक छहों सुत लायो, मातु देवकी शोक मिटायो।
भौमासुर मुर दैत्य संहारी, लाये षट दस सहस कुमारी।
दें भीमहिं तृणचीर संहारा, जरासिंधु राक्षस कहं मारा।
असुरे बकासुर आदिक मारयो, भक्तन के तब कष्ट निवारियो ।
दीन सुदामा के दुःख टारयो, तंदुल तीन मूठि’ मुख डारयो।
प्रेम के साग विदुर घर मांगे, दुर्योधन के मेवा त्यागे।
लखी प्रेमकी महिमा भारी, ऐसे श्याम दीन हितकारी
मारथ के पारध रथ हांके, लिए चक्र कर नहिं बल थांके।
निज गीता के ज्ञान सुनाये, मीरा थी ऐसी मतवाली, विष पी गई बजा कर ताली।
भक्तन हृदय सुधा वर्षाये। राणा भेजा सांप पिटारी, शालिग्राम बने बनवारी ।
निज माया तुंम विधिर्हि दिखायो, उरते संशय सकल मिटायो।
व शत निन्दा करि तत्काला, जीवन मुक्त भयो शिशुपाला।
तवहिं द्रोपदी टेर लगाई, दीनानाथ लाज अब जाई।
रितहि वसन बने नन्दलाला, बढ़े चीर भये अरि मुंह काला।
नस अनाथ के नाथ कन्हैया, डूबत भंवर बचावत नइया।
हुन्दरदास आस उर धारी, दद्यादृष्टि कीजै बनवारी।
हाथ सकल मम कुमति निवारो, क्षमहुबेगि अपराध हमारो।
बोलो पट अब दर्शन दीजै, बोलो कृष्ण कन्हैया की जय।
॥ दोहा ॥
यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करे उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिद्धि फल, लहे पदारथ चारि ॥