
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी तीन महीनों के लिए महामंथन शुरू हो गया है. यह वो समय है, जो प्रदेश के लिए सबसे अहम होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, यह सीजन मानसून का रहता है और इस दौरान प्रदेश में आपदा की घटनाओं को लेकर बेहद ज्यादा आशंकाएं रहती है. खास बात ये है कि आपदा के लिए प्रबंधन पर अभी से चिंतन शुरू हो गया है. इस चिंतन के बीच तमाम विभागों को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि विभागों या जिलों को आपदा प्रबंधन के लिए बजट चाहिए, तो उन्हें पुराने बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देना होगा.
उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रदेश में अगले तीन महीने सबसे संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि इसी दौरान भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और सड़क बाधित होने जैसी आपदाओं की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं. ऐसे में राज्य सरकार ने अभी से विभागों और जिलों के साथ आपदा प्रबंधन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है. ताकि, मानसून आने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी की जा सकें.
मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक: उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए विभागवार तैयारियों की समीक्षा करना था. इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में किए जाने वाले कार्यों और बजट की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
बैठक में कई विभागों की ओर से मानसून से पहले जरूरी कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग रखी गई. विभागों का कहना था कि सड़क सुरक्षा, नदी तटों की सुरक्षा, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में ट्रीटमेंट, राहत सामग्री की उपलब्धता और आपदा से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं के लिए समय रहते धनराशि उपलब्ध होना जरूरी है. खासतौर पर पर्वतीय जिलों में मानसून के दौरान हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं, इसलिए पहले से तैयारी बेहद अहम मानी जा रही है.
हालांकि, बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से साफ कर दिया गया कि राज्य सरकार की तरफ से बजट की कोई कमी नहीं रखी जाएगी, लेकिन जिन विभागों और जिलों को पहले धनराशि जारी की जा चुकी है, उन्हें उसका पूरा खर्च ब्यौरा उपलब्ध कराना होगा. विभाग की ओर से मुख्य सचिव के सामने अब तक जारी की गई सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि का पूरा विवरण भी रखा गया.
कई विभागों ने बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं कराया उपलब्ध: समीक्षा के दौरान ये बात भी सामने आई कि कई विभागों और जिलों ने पूर्व में जारी किए गए बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट यानी उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक शासन को उपलब्ध नहीं कराया है. शासन स्तर पर इसे गंभीरता से लिया गया है, क्योंकि किसी भी नई धनराशि को जारी करने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी होता है कि पहले जारी बजट का इस्तेमाल किन कार्यों में और किस प्रकार किया गया
दरअसल, शासन की वित्तीय व्यवस्था के तहत सभी विभागों को खर्च की गई धनराशि का पूरा विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होता है. इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सरकारी धन का सही इस्तेमाल हुआ है और योजनाएं जमीन पर लागू हुई हैं. यदि विभाग समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं देते हैं तो नई धनराशि जारी करने में दिक्कतें पैदा होती हैं. यही वजह है कि इस बार शासन ने शुरुआत में ही विभागों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पुराने बजट का हिसाब दिए बिना नई मांगों पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा.
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले सभी जरूरी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे कर लिए जाएं. उन्होंने विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर फोकस करने को कहा, जहां हर साल भूस्खलन, सड़क बंद होने या जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इसके अलावा राहत और बचाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी पहले से मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके.
बैठक में ये भी चर्चा हुई कि आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है. कई बार समय पर सूचना और संसाधनों की कमी के कारण राहत कार्य प्रभावित होते हैं. ऐसे में इस बार विभागों को पहले से ही जिम्मेदारियां तय करने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
उन्होंने कहा कि मानसून सीजन को देखते हुए शासन पूरी तरह सतर्क है और सभी विभागों को अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए गए हैं. कोशिश यही है कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में जनहानि और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके. इसके लिए अभी से तैयारियों की समीक्षा और जरूरी कार्यों को तेजी से पूरा कराया जा रहा है.
15 जून से 15 सितंबर तक होता है मानसून सीजन: खास बात ये है कि चारधाम यात्रा भी प्रदेश में चल रही है, ऐसे में आपदा प्रबंधन की तैयारी के बीच चारधाम यात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है और चारधाम रूट पर विशेष तौर पर तैयारी करने के भी निर्देश दिए जाते हैं. राज्य में 15 जून से 15 सितंबर से मानसून सीजन माना जाता है और इन 3 महीनों में कई जगह पर बारिश होने वाली नुकसान के लिए तैयारी की जाती है.
प्रदेश में हर साल मानसून के दौरान कई जिलों में आपदा जैसी स्थितियां बनती हैं. सड़कें बाधित होती हैं, गांवों का संपर्क टूटता है और कई जगह जानमाल का नुकसान भी होता है. ऐसे में इस बार सरकार मानसून शुरू होने से पहले ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटी हुई है. ताकि, आपदा आने पर राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की परेशानी न हो.
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक भी जल्द लेंगे बैठक: उधर, दूसरी तरफ मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद अब आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक जल्द ही बैठक लेने जा रहे हैं. जबकि, इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इन तमाम तैयारियां की खुद समीक्षा करने वाले है. जाहिर है ऐसे में समीक्षा बैठक से पहले विभाग और शासन सभी चीजों को पूरा करने में लगा हुआ है.
मानसून से पहले गड्ढा मुक्त हो जाएं सड़कें: मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मानसून के दौरान कुछ महीने काफी संवेदनशील एवं चुनौतीपूर्ण रहेंगे. वर्तमान में चारधाम यात्रा भी संचालित हो रही है, ऐसे में सभी रेखीय विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में काम करना होगा. उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करते हुए क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत पूरी कर ली जाए.
बिजली एवं पेयजल विभाग को विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों और पेयजल लाइनों की पूर्व मरम्मत एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. ताकि, मानसून के दौरान में विद्युत एवं जलापूर्ति ज्यादा समय तक प्रभावित न हो. उन्होंने शहरी विकास विभाग, नगर निकायों और जिलाधिकारियों को नालों एवं नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
उन्होंने कहा कि जलभराव की स्थिति किसी भी दशा में उत्पन्न नहीं होनी चाहिए. नदी-नालों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने वाले अवरोधों एवं अतिक्रमणों को हटाया जाए. नदी तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए नदियों के चैनलाइजेशन पर विशेष जोर दिया. नदी मार्ग में जमा आरबीएम को हटाया जाए. ताकि, नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो.
आवश्यक सामग्री का भंडारण किया जाए, न हो कोई कमी: मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को गैस, राशन, खाद्यान्न, डीजल एवं पेट्रोल समेत आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए. आपदा की स्थिति में राहत सामग्री एवं खाद्य सामग्री के वितरण के लिए पहले से ही विस्तृत रणनीति तैयार की जाए. ताकि, दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके.
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मानसून सीजन के दौरान संभावित संक्रामक एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा. उन्होंने अभी से फॉगिंग अभियान चलाने और स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड में रखने के निर्देश दिए. साथ ही हेली एम्बुलेंस सेवाओं को भी तैयार रखने को कहा.
क्रियाशील रहें हाइड्रोमेट के सेंसर, नियमित टेस्टिंग जरूरी: मुख्य सचिव ने हाइड्रोमेट सिस्टम, सेंसर और सैटेलाइट फोन का लगातार परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियां और अलर्ट आमजन तक त्वरित रूप से पहुंचे. ताकि, लोग समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा सकें. उन्होंने सचेत एप और सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया.
3 डाॅप्लर रडार संचालित, 3 और लगेंगे: सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में 525 हाइड्रोमेट सेंसर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिनके जरिए विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. जबकि, वर्तमान में 3 डॉप्लर वेदर रडार स्थापित हैं. 3 अतिरिक्त डॉप्लर रडार स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं, जिससे मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और ज्यादा मजबूत होगी.
उन्होंने बताया कि कि पिथौरागढ़ में आरएसआरडब्ल्यू (रेडियो सांडे, रेडिया विंड) की स्थापना प्रस्तावित है. इसके स्थापित होने से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों का ज्यादा सटीक एवं स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान मिल सकेगा, इससे समय रहते चेतावनी जारी कर जनहानि और नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी.
फेक वीडियो प्रसारित करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई: वहीं, मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने आपदा संबंधी भ्रामक एवं फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भ्रामक सूचनाएं आमजन में अनावश्यक भय एवं भ्रम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, जिससे आपदा प्रबंधन कार्य प्रभावित होते हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करें.
