
देहरादून: उत्तराखंड में चढ़ते पारे के बीच धामी सरकार ने ‘हीट वेव’ से निपटने के लिए विस्तृत प्लान तैयार किया है. आम जनता को राहत देने और लू के जानलेवा प्रकोप को रोकने के लिए शासन ने शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के लिए एडवाजरी लागू कर दी है. मुख्य सचिव कार्यालय से जारी हुए एक आदेश के जरिए सभी विभागों को युद्धस्तर पर हीट वेव से लड़ने के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए गये हैं. राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और वन विभाग तक को ‘एक्शन मोड’ में रहने को कहा गया है.
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनता से विषेश अपील की है. उन्होंने बताया मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के विस्तृत चर्चा कर दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सचिव ने कहा, “हीट वेव को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क हैं. हमने स्कूलों के समय को बदलने के अलाना स्कूलों में बच्चों के लिए ‘वॉटर बेल’ शुरू करने और मजदूरों के काम के घंटों में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं. अस्पतालों में विशेष वार्डों की व्यवस्था की गई है.उन्होने प्रदेशवासियों से अपील है कि वे सरकारी एडवाइजरी का पालन करें और गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए सतर्क रहें.
स्कूलों के समय में बदलाव, वाटर बेल की व्यवस्था:– सरकार ने नौनिहालों और बीमारों के लिए सबसे कड़े नियम बनाए हैं. शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि तापमान सीमा से बाहर जाता है, तो स्कूलों के पठन-पाठन के समय में तुरंत बदलाव किया जाए. स्कूलों में अब ‘वॉटर बेल’ (Water Bell) की व्यवस्था होगी. जिसके बजने पर सभी विद्यार्थियों को पानी पीना अनिवार्य होगा. जिससे वे डिहाइड्रेशन का शिकार न हों. कक्षाओं में वेंटिलेशन और हवा की सुविधा सुनिश्चित करने के साथ-साथ हर स्कूल में ओआरएस (ORS) और प्राथमिक उपचार की किट रखना अनिवार्य कर दिया गया है.
अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश:वहीं, चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीजों के लिए डेडिकेटेड वार्ड (Dedicated Ward) आरक्षित किए जाएं. पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों के साथ-साथ एम्बुलेंस में भी ओआरएस पैकेट और आइस पैक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. पैरामेडिकल स्टाफ और आशा वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. जिससे वे गांवों और कस्बों में हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान कर तुरंत इलाज शुरू कर सकें.
मजदूरों और शहरी सुविधाओं के लिए नए नियम: सड़कों पर काम करने वाले श्रमिकों और शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी राहत भरी खबरें हैं. श्रम, उद्योग और खनन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे भीषण धूप के दौरान श्रमिकों के कार्य समय को पुनर्निर्धारित करें. कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए ठंडी जगह (शेड), साफ पेयजल और ओआरएस की व्यवस्था करना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी होगी. शहरी विकास विभाग को बस अड्डों, स्टैंडों और बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की सुचारू व्यवस्था करने को कहा गया है. संवेदनशील इलाकों में पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. नगर निकायों के पार्कों को आम जनता के लिए खुला रखा जाएगा. जिससे लोग गर्मी से राहत पा सकें.
बिजली-पानी की किल्लत और वनाग्नि पर नकेल: गर्मी बढ़ते ही बिजली और पानी की मांग बढ़ जाती है. पेयजल विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन ‘हॉटस्पॉट’ क्षेत्रों की पहचान करें जहां पानी की किल्लत होती है. वहां वैकल्पिक आपूर्ति योजना तैयार रखें. साथ ही, नलकूपों और पंपिंग मशीनों के खराब होने पर उनकी तुरंत मरम्मत के लिए स्पेयर पार्ट्स का स्टॉक रखने को कहा गया है. ऊर्जा विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अतिरिक्त ट्रांसफार्मर का इंतजाम करने के निर्देश हैं.
जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग इस बार ड्रोन पेट्रोलिंग और फायर लाइन पर जोर दे रहा है. ‘सचेत एप’ के माध्यम से वनाग्नि के अलर्ट समय पर प्राप्त किए जाएंगे और त्वरित प्रतिक्रिया बल (QRT) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाएगा. गृह विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे चारधाम यात्रा मार्ग पर अग्निशमन उपकरणों की निरंतर निगरानी करें. फायर हाइड्रेंट्स में पानी का पर्याप्त दबाव सुनिश्चित करें.
गर्मी पड़ने पर क्या करें और क्या न करें ?: शासन ने सूचना विभाग को निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया, रेडियो और प्रिंट मीडिया के माध्यम से लगातार जागरूकता अभियान चलाए. जनता को सलाह दी गई है कि वे पर्याप्त पानी पिएं, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और दोपहर के समय घर से निकलने से बचें. किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा परिचालन केंद्रों (24×7 कंट्रोल रूम) से संपर्क किया जा सकता है.
