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ऋषिकेश वन भूमि सर्वे, तारबाड़ करने पहुंची टीम को फिर झेलना पड़ा आक्रोश, महिलाओं ने किया विरोध

ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग ने सर्वे में शामिल वन भूमि पर तार बाड़ करना शुरू कर दिया है. इस बीच वन विभाग की कार्रवाई का विरोध तेज हो गया है. फिलहाल तार बाड़ का काम शुरू होते ही विरोध के कारण रुका हुआ है.

शनिवार को अमित ग्राम गली नंबर 25 में वन विभाग की टीम जैसे ही दलबल के साथ वन भूमि पर ताड़ बाड़ करने पहुंची, वैसे ही भूमि से संबंधित लोग विरोध करने के लिए पहुंच गए. विरोध के आगे वन विभाग की टीम बेबस नजर आई. वन विभाग की टीम विरोध करने वालों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाने का काम कर रही है. लेकिन लोग विरोध करने से पीछे नहीं हट रहे हैं. विरोध करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक है, जो वन विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करने में भी कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने मेहनत की कमाई से यह जमीन खरीदी है. वह संबंधित भूमि पर पांच दशक से भी अधिक समय से खेती कर रहे हैं. इन जमीनों पर वह वन विभाग को कब्जा लेने नहीं देंगे. फिलहाल तार बाड़ का काम शुरू होते ही विरोध के कारण रुका हुआ है.

इस पूरे मामले पर एसडीओ अनिल रावत का कहना है कि एक दिन पहले जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहयोग मांगा गया था. उन्हें बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है. इसमें किसी भी प्रकार का विरोध करना ठीक नहीं है. लेकिन फिर लोग विरोध कर रहे हैं.

ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड वन विभाग को आदेश देते हुए 5 जनवरी को रिपोर्ट सौंपने का आदेश जारी किया था. जिसके बाद 27 दिसंबर को वन विभाग के सर्वे के कार्य के दौरान लोगों ने विरोध किया था. यही विरोध 28 दिसंबर को बड़े रूप में देखा गया था. लोगों ने रेल मार्ग अवरुद्ध करने के साथ ही पुलिस पर पथराव भी किया था. इस मामले पर पुलिस ने रेल मार्ग रोकने, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर पथराव करने और महिला रेंजर से बदसलूकी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया. पुलिस ने पूरे मामले में कुछ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज के साथ कुछ अज्ञातों को भी शामिल है.

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