
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में आज 5 मई को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान यूपी के रामपुर तिराहा पर हुए गोलीकांड पर सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने राज्य आंदोलन के दौरान हुए यूपी के रामपुर तिराहा कांड (मुजफ्फरनगर) के आरोपियों को सजा दिलाए जाने के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद आज न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सीबीआई से कहा कि 15 दिन के भीतर केस संख्या 42/|1996 में आरोपी तत्कालीन मुजफ्फरनगर डीएम अनन्त कुमार सिंह के केस की क्या स्थिति है कोर्ट को अवगत कराएं.
आज की सुनवाई में एक पक्ष की तरफ से कहा गया कि पूर्व में कोर्ट ने इस केस की स्थिति से अवगत कराने को कहा था, लेकिन अभी तक इस केस का कोई उत्तर यूपी सरकार से नहीं आया है, और न ही सीबीआई की तरफ से कोई जवाब आया. इस पर आज कोर्ट ने सीबीआई को इस केस की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने को कहा है.
इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि अनन्त कुमार केस की स्थिति का कोई पता नहीं चल पा रहा है, न ही इसकी स्थिति से आज तक अवगत कराया गया. जिस पर सीबीआई की तरफ से कहा गया कि राज्य बनने से पहले मुकदमा सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चला. सर्वोच्च न्यायलय ने उसकी जांच इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार उच्च न्यायलय उत्तराखंड को भेजी. उनकी संस्तुति पर सारी फाइलें देहरादून कोर्ट से मुजफ्फरनगर स्थानान्तरित हो गयी. उसके बाद इन केसों में क्या हुआ उनकी स्थिति जानने के लिए उन्हें समय दिया जाये. इस पर कोर्ट ने सीबीआई को 15 दिन का समय देते हुए स्थिति से अवगत कराने को कहा है.
मामले के अनुसार उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के अध्यक्ष रमन साह ने जिला जज व विशेष जज सीबीआई देहरादून की अदालत द्वारा मुजफ्फरनगर कांड से सम्बंधित मुकदमे को देहरादून से मुजफ्फरनगर कोर्ट में ट्रांसफर करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता का कहना है कि 2 अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान दिल्ली जा रहे सैकड़ों उत्तराखंडियों के साथ रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर में बर्बरतापूर्ण व्यवहार हुआ था. इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी. सीबीआई ने देहरादून की अदालत में आरोपियों के खिलाफ 304 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी, जिसका कोर्ट ने 302 के तहत संज्ञान लिया था.
इस मामले में अधिवक्ता रमन साह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को हाईकोर्ट में दायर करने की छूट दी थी, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में दायर हुआ है, जबकि मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनन्त कुमार सिंह अब सेवानिवृत्त हैं.
