
देहरादून: भारतीय वन सेवा यानी IFS कैडर में प्रमोशन के नियम पर बदलाव करने की तैयारी हो रही है. केंद्र सरकार ने प्रमोशन से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत राज्यों से सुझाव मांगे गए हैं. इसी क्रम में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) की ओर से उत्तराखंड सरकार को भी पत्र भेजा गया है. प्रस्तावित बदलावों का असर राज्य वन सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ सकता है.
भारतीय वन सेवा (IFS) कैडर में प्रमोशन को लेकर केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DOPT की ओर से राज्यों को भेजे गए पत्र के बाद अब उत्तराखंड समेत कई राज्यों में इस प्रस्तावित संशोधन को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
प्रमोशन पर पड़ेगा सीधा असर: माना जा रहा है कि इन नए नियमों का सीधा असर राज्य वन सेवा के उन अधिकारियों पर पड़ेगा जो प्रमोशन के जरिए IFS कैडर में शामिल होते हैं. हालांकि इसमें पहले से भी उत्तराखंड के भीतर प्रमोशन को लेकर कभी भी कोई शिथिलता नहीं रही है और मौजूदा आईएफएस कैडर में प्रमोशन के रिक्त पद पर 8 साल की सेवा को अनिवार्य रखा गया है.
केंद्र ने राज्यों ये मांगी राय: इसके अलावा आईएफएस में प्रमोशन के लिए गजेटेड (राजपत्रित) शब्द के बावजूद रेंजर स्तर से सीधे IFS कैडर में किसी को प्रमोशन नहीं दिया गया. केंद्र सरकार ने भारतीय वन सेवा में पदोन्नति प्रक्रिया को और पारदर्शी व व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया है. इसी ड्राफ्ट पर राज्यों से राय मांगी गई है. उत्तराखंड सरकार को भेजे गए पत्र में भी इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां उपलब्ध कराने को कहा गया है.
IFS कैडर में जाने के लिए 8 साल की सेवा जरूरी: दरअसल, वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य वन सेवा के अधिकारी निश्चित सेवा अवधि और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रमोशन के जरिए IFS कैडर में शामिल होते हैं. इसके लिए 8 साल की सेवा को अनिवार्य माना गया है, जिसमें वरिष्ठता के आधार पर IFS कैडर अलॉट किया जाता है.
जानकारी के अनुसार आईएफएस कैडर में प्रमोशन के रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए 8 साल की गजेटेड अधिकारी के रूप में सेवा को अनिवार्य रखा गया है. इस तरह वन विभाग में ACF से एक पद नीचे रेंजर भी इस लिहाज से IFS कैडर में जाने के लिए सीधे अहर्ता रख रहे हैं. इसी को संशोधित करते हुए अब इसमें राज्य वन सेवा स्तर के पद पर 8 साल की सेवा के प्रावधान को रखा जा रहा है.
IFS कैडर आवंटन को लेकर कुछ राज्यों में मामला कोर्ट में भी गया है, जिसके बाद नियम में संशोधन पर विचार किया जा रहा है. संशोधन पर मोहर लगने के बाद राज्य वन सेवा स्तर के अधिकारी को ही आईएफएस कैडर आवंटन मिल सकेगा.
उधर उत्तराखंड में रेंजर संघ पहले ही सरकार से खुद को राज्य वन सेवा में शामिल करने की मांग करता रहा है. यही नहीं गजेटेड ऑफिसर होने के बावजूद इस स्तर की सुविधा उन्हें नहीं मिलने की बात भी कही जाती रही है और इसीलिए रेंजर संघ सुविधा दिए जाने की भी मांग कर रहा है. फिलहाल DOPT के पत्र के बाद वन विभाग और प्रशासनिक स्तर पर प्रस्तावित संशोधन का अध्ययन शुरू हो गया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि उत्तराखंड सरकार इस मसले पर क्या सुझाव भेजती है और केंद्र सरकार अंतिम रूप में किन नियमों को लागू करती है.
