
देहरादून: उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सालों से लंबित सड़कें जल्द बनने जा रही हैं, तो वहीं अगले चरण के लिए भी तैयारी शुरू हो गई है.
हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (IV) के तहत पहले चरण में उत्तराखंड की 184 सड़कों के निर्माण के लिए 1707 करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी, जिस पर अब राज्य सरकार काम शुरू करने जा रही है. सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश में बनाई जाने वाली इन 184 सड़कों की लंबाई कुल मिलाकर तकरीबन 1228 किलोमीटर है. इनकी लागत तकरीबन 1700 करोड़ रुपए की है.
वहीं इसके अलावा उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (IV) के तहत दूसरे चरण में तकरीबन 203 सड़कों की डीपीआर तैयार की गई है. अगले चरण के लिए चिन्हित की गई इन 203 सड़कों पर तैयार की गई डीपीआर के अनुसार इनके निर्माण में तकरीबन 1033 करोड़ की लागत आएगी. उन्होंने कहा कि इसको लेकर विस्तृत डीपीआर तैयार कर दी गई है और इसको लेकर प्रपोजल तैयार किया जा रहा है. सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि हाल ही में उत्तराखंड को केंद्र सरकार द्वारा 184 सड़कों की स्वीकृति दी गई है. स्वीकृत की गई इन सड़कों पर अब तेज गति से कार्य किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि इन 184 सड़कों की स्वीकृति का उद्देश्य यही है कि जिन गांवों में जनसंख्या 250 से अधिक है, उन गांवों को सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ा जाए. विभाग की भी यह प्राथमिकता है कि ऐसी बसावटों को मुख्य धारा से जोड़ा जाए जो कि अभी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ी हुई हैं. यही नहीं उन्होंने बताया कि कुछ गांवों में सड़के हैं, लेकिन उनकी हालत ठीक नहीं है. वहां पर कच्ची सड़कें हैं, उन्हें भी अपग्रेड करके एक उत्तम गुणवत्ता वाली सड़क निर्माण करने का उद्देश्य विभाग का है. उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा स्वीकृत की गई इन सभी सड़कों पर तुरंत ही टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू करके निर्माण कार्य शुरू होगा और तेज गति से इन पर कार्य किया जाएगा.
6000 गांव PMGS के मानकों से बाहर: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGS) के लिए उत्तराखंड से प्रस्तावित किए गए तकरीबन 6000 गांव जनसंख्या की दृष्टि से इस योजना के मानक से बाहर हो गए थे. क्योंकि यह सभी गांव 250 की आबादी से काम के थे. ऐसे में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र सड़क मार्ग से कनेक्ट होने से रह गए थे. ऐसे सभी गांव जो कि पीएमजीएसवाई के मानक के अधीन नहीं आते हैं, उनको लेकर विभाग द्वारा क्या कुछ समाधान निकाला जा रहा है, इसको लेकर भी हमने सवाल किया. इस पर सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए विभाग द्वारा क्लस्टर बेस्ट सॉल्यूशन निकाला गया है.
क्लस्टर योजना में छोटी बसावटें PMGSY के अधीन: ऐसे गांव जिनकी आबादी 250 लोगों से कम थी और वह प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के मानकों से बाहर हो गए थे ऐसे गांवों के लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा समाधान निकालते हुए क्लस्टर योजना के तहत इन बसावटों को लाने की कोशिश की जा रही है. सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि ऐसी छोटी-छोटी बसावटों का क्लस्टर बनाकर यहां इन क्लस्टर को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत लाया जाएगा. ताकि क्लस्टर बेस्ड आबादी योजना के मानकों में आ जाए. उन्होंने कहा कि इसको लेकर विभाग लगातार एक्सरसाइज कर रहा है और इसको लेकर प्लान तैयार किया जा रहा है.
सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि राज्य में अब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तीन अलग-अलग चरणों में हजारों बसावटों को सड़क मार्ग से जोड़ा गया है. उन्होंने बताया कि PMGSY(l) में तकरीबन 10 हजार करोड़ की लागत से 1860 बसावटों को जोड़ने के लिए 19,358 किलोमीटर की सड़कें तैयार की गई, तो वहीं PMGSY(ll) में तकरीबन 112 योजनाएं स्वीकृत हुईं, जिसमें ज्यादातर सड़कें उच्चीकरण से जुड़ी हुई थी. वहीं PMGSY(lll) में 212 सड़कों का उच्चीकरण किया गया.
