14 August 2026

हरिद्वार में होने वाले कुंभ के स्थायी काम हुए पूरे, अब नए प्रस्तावों पर डेडलाइन तय

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देहरादून: हरिद्वार में साल 2027 में होने वाले कुंभ को लेकर तैयारियां अब अगले चरण में पहुंच गई हैं. कुंभ के लिए प्रस्तावित बड़े स्थायी कार्यों में से अधिकतर को लगभग पूरा किया जा चुका है, जबकि अस्थायी कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है. अब प्रशासन का फोकस उन नए कार्यों और व्यवस्थाओं पर है, जिनकी जरूरत कुंभ के दौरान महसूस की जा रही है और जिनके लिए अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स की ओर से मांग रखी गई है.

इसी सिलसिले में गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. बैठक में साधु-संत समाज, गंगा सभा, स्थानीय प्रशासन और कुंभ से जुड़े दूसरे स्टेकहोल्डर्स के प्रतिनिधियों के साथ संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे. बैठक का मकसद नए प्रस्तावों की जरूरत, उपयोगिता और व्यवहारिकता पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप देना है. खास बात यह है कि इन प्रस्तावों पर निर्णय के लिए समय सीमा भी तय की गई है. प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले एक सप्ताह में नए कार्यों को लेकर सहमति बना ली जाए, ताकि जरूरत के मुताबिक उन्हें समय रहते धरातल पर उतारा जा सके.

दरअसल कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए आधारभूत ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की तैयारी पहले ही शुरू कर दी गई थी. स्थायी प्रकृति के कई काम पूरे हो चुके हैं, जबकि जिन कार्यों को कुंभ के दौरान अस्थायी तौर पर तैयार किया जाना है, उनके लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है. इनमें श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात प्रबंधन, घाटों और स्नान क्षेत्रों की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं.हालांकि तैयारियों के आगे बढ़ने के साथ ही जमीनी स्तर पर कुछ ऐसी जरूरतें भी सामने आई हैं, जो शुरुआती कार्ययोजना में शामिल नहीं थीं.

इन्हीं जरूरतों को नए प्रस्तावों के तौर पर देखा जा रहा है. प्रशासन अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नए काम को केवल मांग के आधार पर मंजूरी न मिले, बल्कि उसकी वास्तविक आवश्यकता, कुंभ के दौरान उपयोगिता और समय पर पूरा होने की संभावना को भी देखा जाए. हरिद्वार में होने वाला यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और हर की पैड़ी समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान करते हैं. ऐसे में कुंभ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना होती है. यही वजह है कि प्रशासन अब स्थायी निर्माण के साथ-साथ आयोजन के दौरान जरूरी अस्थायी व्यवस्थाओं और नए प्रस्तावों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है.

इस बार कुंभ को लेकर सरकार की तैयारी का एक अहम पहलू यह भी है कि अर्धकुंभ को महाकुंभ की तर्ज पर भव्य और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी है. यानी आयोजन भले ही अर्धकुंभ हो, लेकिन सरकार की कोशिश है कि इसकी व्यवस्थाएं, सुविधाएं और आयोजन का स्तर किसी भी मायने में महाकुंभ से कम न हो. इसका सीधा असर हरिद्वार की बुनियादी सुविधाओं और आयोजन प्रबंधन पर पड़ना तय है. कुंभ की तैयारियां अब उस दौर में पहुंच गई हैं, जहां पहले से तय परियोजनाओं के साथ-साथ आयोजन की वास्तविक जरूरतों के आधार पर नई व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. आने वाला एक सप्ताह इसलिए अहम होगा, क्योंकि इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि नए प्रस्तावों में किन कार्यों को मंजूरी मिलती है और कुंभ से पहले उन्हें किस तरह धरातल पर उतारा जाएगा.

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