70 साल की बुजुर्ग फिसलकर हुई घायल, न सड़क न अस्पताल पहुंचाने वाले, 3 किमी डोली में ले गए लोग
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बेरीनाग: पिथौरागढ़ जिले का दूरस्थ गांव पभ्या आज भी सड़क सुविधा वंचित है. जिससे ग्रामीणों को आए दिन परेशान होना पड़ता है. सड़क के अभाव में पलायन की मार झेल रहे पभ्या गांव में अब बीमार और घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली उठाने वाले कंधे भी कम पड़ गए हैं. गुरुवार को भी एक कराहती बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन गया.
महिला को डोली में लाद 3 किमी चले ग्रामीण: दरअसल, पिथौरागढ़ के गणाई गंगोली के पभ्या गांव की भागीरथी देवी पत्नी प्रयाग सिंह (उम्र 70 वर्ष) बारिश के दौरान पैर फिसलने से घायल हो गईं थी. पैदल चलकर अस्पताल पहुंचना उनके लिए संभव नहीं था. ऐसे में ग्रामीणों ने डोली का इंतजाम किया, लेकिन उसे उठाने के लिए पर्याप्त युवा नहीं मिले. ग्रामीणों ने किसी तरह करीब तीन किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक डोली पहुंचाई. इसके बाद घायल महिला को सीएचसी बेरीनाग ले जाया गया.
सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों को होती है परेशानी: बता दें कि आजादी के 80 और राज्य गठन के 26 साल बाद भी सीमांत जिले के कई दूरस्थ गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं. पभ्या में सबसे बड़ी समस्या सड़क संपर्क की है. जहां गांव तक सड़क न होने से बीमार और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है. किसी के बीमार होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में तीन किलोमीटर तक डोली ही एकमात्र सहारा है.
सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा गांव: सरकारी योजनाओं हर घर नल से जल पहुंचाने के दावों के बीच पभ्या का बुरा हाल से ग्रामीण पेयजल संकट से भी जूझ रहे हैं. साल 1988 में 25 किलोमीटर दूर से बनाई गई पेयजल योजना जर्जर हो चुकी है. आए दिन जलापूर्ति बाधित होने पर ग्रामीणों को करीब तीन किलोमीटर दूर प्राकृतिक जलस्रोत से पानी ढोकर लाना पड़ता है. नेता चुनाव के समय गांव में सड़क और पानी लाने की घोषणा तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई भी लौटकर गांव नहीं आता है. आज तक हमारे गांव में कोई भी विधायक, सांसद नहीं पहुंचा है. हमारे जनप्रतिनिधि खुद महंगी गाड़ियों में सफर करते हैं, लेकिन जनता के लिए सड़क तक नहीं बनाई जा रही है
घायल या बीमार को अस्पताल पहुंचाने के लिए नहीं मिल रहे लोग: सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीणों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है. एक दशक पहले गांव में करीब 100 परिवार रहते थे. जबकि, अब केवल 38 परिवार ही रह गए हैं. 62 परिवार पलायन कर चुके हैं. ग्रामीणों की मानें तो गांव में अब ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं ही रह गई हैं. ऐसे में किसी बीमार या घायल व्यक्ति को डोली से सड़क तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त लोग जुटाना भी मुश्किल हो रहा है.
