27 July 2026

शीतलहर पर आपदा प्रबंधन विभाग की वर्कशॉप आज, जानिए क्या कुछ रहेगा खास

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देहरादून: उत्तर भारत में इस वक्त कड़ाके की ठंड पड़ रही है. उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाल ही में हुई बर्फबारी की वजह से तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है. बर्फबारी के बाद जहां पहाड़ों पर शीतलहर चल रही है तो वहीं मैदानी इलाकों ने कोहरे की सफेद चादर ओढ़ रखी है, जिससे ठिठुरन और बढ़ गई है. ऐसे में शीतलहर से बचने के लिए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने विशेष तौर पर तैयारी कर की है.

आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि शीतलहर को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले ही तैयारी करनी शुरू कर दी थी. जिले के सभी अधिकारियों को भी दिशा-निर्देश दिए गए थे. इसके अलावा एसीओ स्तर पर भी एक बैठक की गई थी. वहीं सचिव स्तर पर भी दो बैठकें हो चुकी है. एक बैठक खुद मुख्य सचिव ले चुके है. शासन और विभागीय दोनों ही स्तर से भी सभी को विस्तार में निर्देश दिये जा चुके हैं.

कोल्ड वेव को लेकर वर्कशॉप: आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 9 जनवरी को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शीतलहर (कोल्ड वेव) को लेकर एक वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है. इस वर्कशॉप में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे. इसके अलावा राज्य और केंद्रीय एजेंसियां भी इस वर्कशॉप में मौजूद रहेंगी.

इस वर्कशॉप में 200 से ज्यादा अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से प्रतिभाग करेंगे तो वहीं जिलों से सभी जिलाधिकारी और अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे, जिसमें तहसील से लेकर ब्लॉक स्तर तक के अधिकारी मौजूद होंगे. किस विभाग की क्या जिम्मेदारी, उसके बाद में इस वर्कशॉप में विस्तार से बताया जाएगा.

बर्फबारी को लेकर तैयारी पूरी: ठंड बढ़ने या फिर बर्फबारी होने पर आपदा प्रबंधन की क्या तैयारी है? इसको लेकर सचिव आपदा प्रबंधन विनोद सुमन ने बताया कि विभाग पूरी तरह से तैयार हैं. उन्होंने जानकारी दी कि जहां-जहां बर्फबारी में जहां-जहां भी सड़कों के बंद होने की आशंका है, वह पर जरूरत की सभी मशीनों को तैनात करने के निर्देश दिए गए है.

इसके अलावा जिन जगहों पर रास्ते बंद होने की वजह से रोजमर्रा की जरूरतों का सामना प्रभावित हो सकता है, वहां पर पहले ही मार्च तक का भंडारण कर दिया गया हैं. कई जगहों पर कुछ दिक्कतें थी, उनका भी समाधान किया जा चुका है.

गर्भवती महिलाओं का भी डेटाबेस तैयार किया गया: इसके अलावा इस दौरान की गर्भवती महिलाओं का भी डेटाबेस तैयार किया गया है और इन महिलाओं को एसी जगहों पर फिलहाल स्थानांतरित किया गया है, जहां पर उन्हें नजदीकी चिकित्सा केंद्र में जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल पाए.

इसके अलावा सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 15 जून से लेकर 15 सितंबर तक प्रदेश में मानसून सीजन चलता है. इस दौरान लगभग सभी विभाग आपदा प्रबंधन के कामों में लगे रहते है. वहीं 15 सितंबर से लेकर 15 जून तक का समय यानी ऑफ सीजन में विभाग आपदा प्रबंधन के लिए तैयारियों में लगा रहा है. इस दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाते है.

जनजागरण अभियान का लक्ष्य: इस साल का जनजागरण अभियान का लक्ष्य तकरीबन एक लाख 90 हजार लोगों को जागरूक करने का रखा गया है, जिसमें से अब तक 40 हजार लोगों को जागरूक किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन के अलग-अलग माध्यमों से प्रदेशवासियों को आपदाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है. यही नहीं उन्होंने बताया कि मार्च महीने तक इन सभी 1 लाख 90 हजार लोगों को ट्रेनिंग भी दिये जाने का लक्ष्य रखा गया है. इस जागरण अभियान को लेकर नवम्बर में आदेश जारी किये गये थे, उस समय तक तकरीबन 30 हजार लोगों की ट्रेनिंग की जा चुकी थी. इस प्रकार से इस वित्तीय वर्ष के अंत तक आपदा प्रबंधन तकरीबन 2 लाख 30 हजार लोगों को जागरूक करने का करने का लक्ष्य रखा गया है.

इसके अलावा कई तरह की अलग-अलग ट्रेनिंग भी करवाई जा रही है. कुछ दिन पहले मॉक ड्रिल करवाई गयी थी. मानसून सीजन की शुरुआत में भी ट्रेनिंग और बड़ी मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है.वहीं अब एक कार्यशाला कल आयोजित की जा रही है. यही नहीं आपदा प्रबंधन से संबंधित जो अभिलेख टुकड़ो-टुकड़ो में इधर उधर है, उसे संकलित कर के कई अलग-अलग SOP का निर्माण किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आज होने वाली वर्कशॉप में आपदा प्रबंधन से संबंधित कई SOP का लॉन्च किया जाएगा जिसमें मॉक ड्रिल, बाढ़, कोल्ड वेव्स, इयर इवेक्युएशन इत्यादी केस शामिल होगें.

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