हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो चले आइए यहां, उमड़ रही भीड़

रुद्रपुर: गांधी पार्क में आयोजित सरस आजीविका मेला में इस बार हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सिरमौर से आई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे पहाड़ी पकवानों का स्वाद लेने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
जिला प्रशासन द्वारा रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित सरस आजीविका मेला आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करता नजर आ रहा है. मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों ने अपने पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं. यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और महिलाओं को अपनी आय बढ़ाने का सशक्त मंच भी प्रदान कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद के हरिपुरधार स्थित ग्राम पंचायत दिउड़ी खड़ाह के स्वयं सहायता समूह ने अपने स्टॉल पर पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों की खुशबू बिखेर दी है. समूह की सदस्य सोनू राणा द्वारा तैयार किए गए व्यंजन मेले में आए लोगों को खूब लुभा रहे हैं. स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर इन व्यंजनों को चखने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही है.
सोनू राणा ने बताया कि हिमाचल में इन व्यंजनों की काफी मांग रहती है. उन्होंने कहा कि आजकल बच्चे फास्ट फूड जैसे मोमोज, चाउमीन और बर्गर की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. इसके विपरीत हिमाचली पारंपरिक भोजन पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है. प्रमुख व्यंजनों में सिद्धू खास आकर्षण का केंद्र है, जिसे विभिन्न प्रकार के आटे को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसे मीठी और नमकीन दोनों तरह की चटनियों के साथ परोसा जाता है. इसकी विशेषता यह है कि इसे पहाड़ी छोटी गाय के घी के साथ खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. मीठी चटनी काजू, बादाम और अखरोट के साथ बनाई जाती है, जबकि खट्टी चटनी भांग के दाने, सफेद तिल, उड़द की दाल और अखरोट से तैयार की जाती है.
इसके अलावा लाल चावल से बनी ‘खीर’ भी लोगों को खूब पसंद आ रही है. ‘पटांडा’ और राजमा के साथ परोसी जाने वाली ‘काली’ भी स्टॉल पर उपलब्ध हैं. सोनू राणा ने कहा कि जो भी एक बार इन व्यंजनों का स्वाद चख लेता है, वह इसे कभी नहीं भूलता. उन्होंने उत्तराखंड सरकार और मेले के आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं और किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है. मंच के माध्यम से उनकी आजीविका सुदृढ़ हो रही है.
