25 July 2026

जखोली के जंगल में आग सुलगा रहा था शख्स, वनकर्मियों ने ड्रोन से पकड़ा

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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वन विभाग अब हाईटेक तकनीकों का सहारा ले रहा है. इसी कड़ी में जखोली रेंज में वन विभाग की टीम ने ड्रोन निगरानी के दौरान एक व्यक्ति जंगल में आग सुलगाता मिला. जिसके बाद उसे दबोच लिया. विभाग ने आरोपी के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

डीएफओ खुद कर रहे ड्रोन मॉनिटरिंग: प्रभागीय वनाधिकारी खुद ड्रोन के माध्यम से संवेदनशील वन क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं. इसी कड़ी में 20 मई को जखोली रेंज के तैला कक्ष संख्या 7 में ड्रोन कैमरे की निगरानी के दौरान एक व्यक्ति को जंगल में आग लगाते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया. सूचना मिलते ही वन दरोगा बड़मा अनुभाग और तैला बीट की टीम तत्काल मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपी अंधेरे और रात का फायदा उठाकर फरार हो गया.

अगले ही दिन दबोचा गया आरोपी: वन विभाग की टीम ने अगले दिन 21 मई को घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया और स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ की. जांच में खुलासा हुआ कि आग लगाने की घटना को जखोली तहसील के पंद्रोला कुमड़ी के त्रिलोक सिंह जगवान ने अंजाम दिया था. पूछताछ में आरोपी ने वन क्षेत्र में आग लगाने की बात स्वीकार कर ली.

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा: इसके बाद वन विभाग ने आरोपी को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 (संशोधित 2001) की धारा 26(ख) एवं 26(ग) के अंतर्गत वन अपराध दर्ज किया गया है. इन धाराओं के तहत आर्थिक दंड के साथ अधिकतम दो साल तक के कारावास का प्रावधान है.

आग लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा: डीएफओ रजत सुमन ने कहा कि वन विभाग का मुख्य उद्देश्य जनसहयोग से वनाग्नि की घटनाओं को रोकना और लोगों को जागरूक करना है. इसी उद्देश्य से 5 मई से 11 मई 2026 तक ‘वन अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ मनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया था.

अब तक 13 मामलों में हो चुकी गिरफ्तारियां: उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर जंगलों में आग लगाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने बताया कि वर्तमान फायर सीजन में अब तक वनाग्नि फैलाने के कुल 13 मामलों में गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं. वहीं, ड्रोन तकनीक के जरिए आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी करना वन विभाग के लिए आसान हो गया है.

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