टिहरी दुग्ध संघ को घाटे से उबारने की कवायद, प्लांट शुरू करने से लेकर आंचल कैफे खोलने की तैयारी
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टिहरी: टिहरी गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है. लगातार घाटे के चलते संघ पर वर्तमान में करीब एक करोड़ रुपये की देनदारी बताई जा रही है. प्लांट की लाखों रुपये की मशीनें धूल फांक रही हैं. वहीं कर्मचारियों की कमी भी संघ के कामकाज में बड़ी बाधा बनी हुई है. अब दुग्ध संघ को घाटे से उबारने के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं.
गौर हो कि उत्तराखंड में दुग्ध उत्पादनों को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है. लेकिन टिहरी में टिहरी गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लंबे समय से घाटे में चल रहा है. जिसे जल्द घाटे से उबारने के लिए कसरत तेज हो गई है. संघ के प्रशासक सुशील रावत के मुताबिक, सबसे पहले प्लांट को दोबारा शुरू करने की कवायद की जा रही है. इसके साथ ही सचिवों की नियुक्ति और आंचल कैफे खोलने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.
टिहरी गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की आर्थिक स्थिति लंबे समय से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. घाटे के चलते संघ पर करीब एक करोड़ रुपये की देनदारी हो गई है. संसाधन होने के बावजूद प्लांट की कई मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जबकि कर्मचारियों की कमी के कारण भी कामकाज प्रभावित हो रहा है. ऐसे में अब संघ को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है.पहले चरण में बंद पड़े प्लांट को शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही दुग्ध समितियों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए सचिवों की नियुक्ति की जा रही है. संघ की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए आंचल कैफे खोलने की भी तैयारी है. इसके जरिए उत्पादों के प्रचार-प्रसार के साथ गुणवत्ता और मात्रा यानी क्वालिटी और क्वांटिटी पर भी विशेष फोकस करने की बात कही जा रही है.
फिलहाल टिहरी दुग्ध संघ को घाटे से बाहर निकालना बड़ी चुनौती है. लेकिन प्लांट संचालन, कर्मचारियों की नियुक्ति और आंचल कैफे जैसी योजनाओं से संघ को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. अब देखना होगा कि ये प्रयास आर्थिक संकट से जूझ रहे दुग्ध संघ को किस हद तक आत्मनिर्भर बना पाता हैं.
