19 August 2026

देहरादून मास्टर प्लान में 3 से 4 फीसदी अतिरिक्त क्षेत्र जुड़ा, GIS आधारित प्लान तैयार करने की कवायद तेज

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देहरादून: शहर और आसपास के क्षेत्रों में भविष्य के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए तैयार किए जा रहे जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित मास्टर प्लान में मौजूदा क्षेत्र के साथ करीब 3 से 4 फीसदी अतिरिक्त क्षेत्र को भी शामिल किया गया है. देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे इस मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्र से लेकर व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक सुविधाओं, परिवहन और मनोरंजन के लिए भूमि उपयोग का अलग-अलग निर्धारण किया गया है.

एमडीडीए के वाइस चेयरमैन बंशीधर तिवारी के मुताबिक, नए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान के जरिए पूरे प्राधिकरण क्षेत्र के विकास को एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक योजना के तहत आगे बढ़ाने की कवायद की गई है. प्रस्तावित प्लान में मौजूदा जोनल डेवलपमेंट प्लान के अतिरिक्त करीब 3 से 4 फीसदी क्षेत्र को शामिल किया गया है.

37,800 हेक्टेयर में तैयार किया गया मास्टर प्लान: प्रस्तावित मास्टर प्लान के नक्शे के मुताबिक कुल 37,800 हेक्टेयर क्षेत्र को योजना क्षेत्र के तौर पर दर्शाया गया है. इसमें अलग-अलग श्रेणियों के तहत क्षेत्र का विभाजन किया गया है. कुल क्षेत्र में 9,872 हेक्टेयर वन क्षेत्र, 3,059 हेक्टेयर कैंटोनमेंट क्षेत्र, 17,916 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र और 6,952 हेक्टेयर अविकास योग्य क्षेत्र शामिल है. यानी मास्टर प्लान में सिर्फ मौजूदा आबादी वाले और विकसित इलाकों को ही शामिल नहीं किया गया है, बल्कि वन, कैंटोनमेंट और अविकास योग्य क्षेत्रों को भी अलग-अलग श्रेणियों में मैप किया गया है. इससे प्राधिकरण क्षेत्र में भविष्य के विकास के लिए उपलब्ध भूमि और उन क्षेत्रों की स्थिति को एक समग्र GIS आधारित नक्शे में समझने की कोशिश की गई है.

आवासीय उपयोग के लिए सबसे ज्यादा जमीन: मास्टर प्लान में डेवलपमेंट एरिया के लैंड यूज डिस्ट्रीब्यूशन पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा हिस्सा रेजिडेंशियल यानी आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित किया गया है. कुल विकास योग्य क्षेत्र में आवासीय क्षेत्र की हिस्सेदारी 58.43 फीसदी है. इसके बाद परिवहन के लिए 11.15 फीसदी और सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए 9.42 फीसदी क्षेत्र रखा गया है.

वहीं मिश्रित भूमि उपयोग के लिए 9.33 फीसदी, मनोरंजन के लिए 5.98 फीसदी और व्यावसायिक उपयोग के लिए 4.28 फीसदी क्षेत्र प्रस्तावित है. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र के लिए 1.07 फीसदी और पर्यटन के लिए 0.34 फीसदी हिस्सेदारी दिखाई गई है. इस तरह प्रस्तावित भूमि-उपयोग वितरण में आवासीय जरूरतों के साथ-साथ परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं, व्यावसायिक गतिविधियों और मनोरंजन के लिए भी अलग-अलग हिस्से निर्धारित किए गए हैं.

मौजूदा प्लान में नए क्षेत्र भी शामिल: मास्टर प्लान के साथ तैयार किए गए दूसरे मानचित्र में मौजूदा जोनल डेवलपमेंट प्लान के अतिरिक्त प्रस्तावित क्षेत्रों को अलग से चिन्हित किया गया है. मानचित्र में कई हिस्सों को लालडॉटेड सर्कल के माध्यम से दिखाया गया है. दस्तावेज के मुताबिक यह अतिरिक्त क्षेत्र, पहले से लागू जोनल डेवलपमेंट प्लान के अतिरिक्त जोड़ा जा रहा है और इसका क्षेत्रफल कुल मास्टर प्लान क्षेत्र का लगभग 3 से 4 फीसदी है.

आवास के साथ परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं पर जोर: प्रस्तावित भूमि-उपयोग वितरण से यह भी सामने आता है कि नए मास्टर प्लान में आवासीय जरूरतों के साथ शहर के भविष्य के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी महत्व दिया गया है. विकसित क्षेत्र में 11.15 फीसदी हिस्सा परिवहन के लिए रखा गया है, जबकि 9.42 फीसदी पब्लिक एंड सेमी पब्लिक उपयोग के लिए है. इसी तरह मिक्स्ड लैंड यूज, व्यावसायिक, मनोरंजन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग हिस्सेदारी निर्धारित की गई है. इसका मतलब यह है कि मास्टर प्लान में भविष्य के विकास को केवल आवासीय विस्तार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि शहर की अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक भूमि उपयोग का संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है.

अतिरिक्त क्षेत्र के साथ बढ़ेगा नियोजित विकास का दायरा: एसडीडीए के मुताबिक, नए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान में मौजूदा जोनल डेवलपमेंट प्लान के अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल करने की प्रक्रिया प्राधिकरण क्षेत्र के नियोजित विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. अतिरिक्त क्षेत्र कुल मास्टर प्लान क्षेत्र का करीब 3 से 4 फीसदी बताया गया है. 37,800 हेक्टेयर के योजना क्षेत्र में वन, कैंटोनमेंट, विकसित और अविकास योग्य क्षेत्र को अलग-अलग चिन्हित करते हुए विकसित क्षेत्र के भीतर विभिन्न भूमि उपयोग निर्धारित किए गए हैं.

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