ज्योलीकोट महामारी: हाईकोर्ट ने कहा ’21वीं सदी में ऐसी स्थिति अत्यंत चिंताजनक’, लगाई फटकार, 6 दिन में मांगी रिपोर्ट
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नैनीताल: जिले के समीपवर्ती गांवों ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण इन दिनों बीमारियां फैली हुई हैं. अब तक दो लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. 250 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं. इलाके में फैली बीमारियों और मौतों पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है.
ज्योलीकोट महामारी पर हाईकोर्ट में सुनवाई: अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत तथा जल संस्थान व जल निगम के शीर्ष अधिकारी पेश हुए. कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल की पाइपलाइनों की मरम्मत कर ली जातीं, तो ग्रामीणों को इस संकट का सामना न करना पड़ता.
हाईकोर्ट ने ज्योलीकोट में महामारी जैसी स्थिति बताई: अदालत ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब को जल्द से जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल और आसपास के 20 से 25 विभिन्न जल स्रोतों से सैंपल लेकर 6 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है. पीठ ने इसे महामारी जैसी स्थिति करार देते हुए जिलाधिकारी को राहत कार्यों की स्वयं मॉनिटरिंग करने, प्रभावित इलाकों में टैंकरों से शुद्ध पेयजल भिजवाने और सीवर लीकेज की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा है.
लचर स्वास्थ्य सुविधाओं पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: स्वास्थ्य सुविधाओं पर टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा कि 21वीं सदी में ऐसी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. यदि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो बिना किसी संकोच के बाहर से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम बुलाई जानी चाहिए. कोर्ट के रुख को देखते हुए जिलाधिकारी ने मरीजों के निजी लैबों में एलाइजा व अन्य जरूरी टेस्ट कराने के लिए 4 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर और बढ़ाया जाएगा. वहीं याचिकाकर्ता की ओर से बड़ी संख्या में मरीजों की लिवर रिपोर्ट पेश कर प्रभावितों के नि:शुल्क इलाज और मुआवजे की मांग रखी गई.
जल संस्थान ने माना पेयजल में मिक्स हुआ सीवर का पानी: प्रशासनिक और जल संस्थान के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास जल स्रोत में सीवर का पानी मिक्स होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई. इस पर कोर्ट ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही से फैली है. इसलिए इसके इलाज और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी.
ज्योलीकोट में क्या हुआ है? नैनीताल जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर ज्योलीकोट ब्लॉक के गांवों में इन दिनों महामारी फैली है. दूषित पेयजल से इलाके के गांवों के 2 जवान युवक और युवती की मौत हो गई है. 250 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं. लोग डायरिया, पेचिश, टाइफाइड, हैजा, पीलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं. इलाके में बीमारी कई दिन से फैली है. कई बार शिकायत करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप है.
ये हैं जनता के प्रति जवादेय अधिकारी और जनप्रतिनिधि: दिलचस्प बात ये है कि ये सब उस जिले में हो रहा है, जहां कुमाऊं कमिश्नर बैठते हैं. दीपक रावत कुमाऊं कमिश्नर हैं. जिले की सीएमओ डॉ. रश्मि पंत हैं. ललित मोहन रयाल नैनीताल जिले के डीएम हैं. ये क्षेत्र नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. अभी यहां से विधायक बीजेपी की सरिता आर्या हैं. लोकसभा क्षेत्र के सांसद बीजेपी के अजय भट्ट हैं. उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री अभी सुबोध उनियाल हैं.
