हाईकोर्ट का अहम फैसला: एसएसबी डिप्टी कमांडेंट की पदोन्नति पर रोक नहीं, परिणाम लिफाफे में रहेगा बंद
![]()
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने (एसएसबी) रानीखेत में तैनात डिप्टी कमांडेंट (कम्युनिकेशन) हरीश चंद्र सिंह बिष्ट की याचिका पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सामान्यतः कानून के तहत चार्जशीट को अदालत में तब तक चुनौती नहीं दी जा सकती, जब तक कि वह किसी ऐसे प्राधिकारी द्वारा जारी न की गई हो जो इसके लिए सक्षम न हो, चूंकि याचिकाकर्ता ने जारी करने वाले अधिकारी की सक्षमता पर सवाल नहीं उठाया है, इसलिए अदालत ने चार्जशीट के पीछे कोई दुर्भावना होने के बिंदु पर विचार करने से इनकार कर दिया.
हालांकि, परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने एसएसबी के महानिदेशक को आदेश दिया है कि वे 30 जून 2025 को जारी चार्जशीट के संबंध में चल रही कार्रवाई को पूरा करें और इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार अंतिम आदेश पारित करें. याचिकाकर्ता हरीश चंद्र सिंह बिष्ट ने अपनी रिट याचिका में 30 जून 2025 को महानिरीक्षक (फ्रंटियर मुख्यालय, एसएसबी, रानीखेत) द्वारा जारी चार्जशीट और 11 जुलाई 2025 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी.
जिसके तहत उनके खिलाफ ‘रिकॉर्ड ऑफ एविडेंस’ तैयार करने का आदेश दिया गया था. याचिकाकर्ता का तर्क था कि जब उनके कमांडेंट (कम्युनिकेशन) के पद पर पदोन्नति का समय आया, तो उन्हें रोकने के उद्देश्य से यह प्रेरित और झूठी चार्जशीट जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य उनके प्रमोशन के अधिकार से वंचित करना था. याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि प्रतिवादियों को इस चार्जशीट के आधार पर याचिकाकर्ता की करियर प्रगति (कैरियर प्रोग्रेशन) पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न डालने का निर्देश दिया जाए.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि तीन सप्ताह की अवधि के दौरान या जब तक प्रतिवादी महानिदेशक, एसएसबी द्वारा अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाता, तब तक वर्ष 2027 की रिक्त वर्ष के लिए कमांडेंट (कम्युनिकेशन) के पद पर कोई अन्य पदोन्नति नहीं की जाएगी. याचिकाकर्ता सबसे वरिष्ठ डिप्टी कमांडेंट (कम्युनिकेशन) हैं, इसलिए चल रही चयन प्रक्रिया में उनके क्लेम पर भी विचार किया जाएगा. हालांकि, उनका परिणाम एक बंद लिफाफे में रखा जाएगा, जिसे तभी खोला जाएगा जब वह 30 जून 2025 की चार्जशीट से शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई में पूरी तरह से दोषमुक्त पाए जाते हैं.
