27 July 2026

धराली आपदा से लिया सबक, संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करने पर जोर, जिलों के रिपोर्ट पर होगा मिटिगेशन मेजर

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देहरादून: उत्तराखंड राज्य को हर साल मानसून सीजन के दौरान आपदाओं का दंश झेलना पड़ता है. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से मानसून शुरू होने से पहले हो तमाम तैयारियां कर ली जाती हैं. लेकिन जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, उस दौरान सरकार की तैयारियां धरी की धरी रह जाती हैं. ऐसी ही कुछ स्थिति पिछले साल धराली आपदा के दौरान देखा गया था. जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने अब प्रदेश के उन संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जहां पर पहले आपदा आने की वजह से नुकसान हुआ है, इसके साथ ही ऐसे क्षेत्र जहां पर आबादी को नुकसान पहुंच सकता है. इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले चरण में तीन जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन किया है.

आपदा के लिहाज से यूं तो पूरा प्रदेश ही संवेदनशील है. लेकिन प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अक्सर आपदा जैसे हालात बनते रहते हैं. जिसके चलते आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाती है. साथ ही हर साल आपदा की वजह से जान-माल का काफी नुकसान पहुंचता है. जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग आगामी मानसून सीजन से पहले आपदा प्रभावित जिलों का सर्वे करने का निर्णय लिया है. जिसमें सेटेलाइट सर्वे के साथ ही ड्रोन सर्वे किया जाएगा. वर्तमान समय में प्रदेश के तीन जिले उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में आपदा प्रबंधन विभाग की टीम ने सर्व कर लिया है. साथ ही इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भी सौंप दी गई है.

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि प्रदेश में संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है. यानी जहां पर पानी आने से आबादी को खतरा हो सकता है. पहले चरण में उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले को चुना गया है. वर्तमान समय में संवेदनशील क्षेत्रों के चयन को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से एक टीम को चमोली जिले में भेजा गया था. जिले का सबसे पहले सेटेलाइट सर्वे और फिर ड्रोन सर्वे किया गया है. इसके बाद खतरे का आकलन करते हुए पूरी रिपोर्ट चमोली प्रशासन को सौंपी गई है. इसके साथ ही अन्य जिलों का भी सर्वे कर लिया गया है. इन सभी जिलों का प्रशासन को सर्वे के लिए कहा गया है. आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से आकलन किया गया है कि कहां-कहां अतिवृष्टि से, नाले में अधिक पानी, गदेरे में पानी आने से या फिर मालबा आने से किस-किस आबादी को खतरा हो सकता है.

इसका आकलन करते हुए रिपोर्ट जिलों को भेजा गया है. जिलों को रिपोर्ट भेजने के बाद जिलों को जल्द से जल्द ड्रोन सर्वे कराने को कहा गया है. ऐसे में उसके रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा. कि किस तरह के मिटिगेशन के मेजर अपनाने की जरूरत है उसको किया जाएगा. ऐसे में अगर इंस्ट्रूमेंट लगाने की जरूरत होगी तो लगाया जाएगा. साथ ही बताया कि जो डैम अथॉरिटी है उनके द्वारा जब पानी छोड़ा जाता है, वो पानी कहां तक पहुंचेगा, उससे वॉटर लेवल में कितनी बढ़ोत्तरी होगी, उसका तमाम माध्यमों से मॉनिटरिंग की जाती है. इसके अलावा, तमाम स्थानों पर सायरन भी लगाए गए हैं. साथ ही बताया कि पिछले साल भी डैम अथॉरिटी के साथ बैठक हुई थी, ऐसे में इस साल भी बैठक प्रस्तावित है. ऐसे में प्रस्तावित बैठक के दौरान डैम अथॉरिटी से अनुरोध किया जाएगा कि जहां जहां जरूरत है वहां पर सायरन लगाया जाए. इसके अलावा, आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भूकंप परियोजना के तहत भी सायरन लगाए गए हैं.

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