17 August 2026

पीजीआई रैंकिंग में उत्तराखंड ने किया सुधार, देश में अब 15वें स्थान पर पहुंचा राज्य

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देहरादून: विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है. भारत सरकार की ओर से जारी वर्ष 2024-25 की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 रिपोर्ट में राज्य ने 584.5 अंक हासिल करते हुए देशभर में 15वां स्थान प्राप्त किया है. पिछले साल राज्य इस रैंकिंग में 24वें स्थान पर था. इस तरह एक साल के भीतर उत्तराखंड ने नौ स्थानों की छलांग लगाकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है.

पीजीआई रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड ने अपनी श्रेणी में भी उल्लेखनीय सुधार किया है. राज्य को पहले आकांक्षी-1 श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इस बार प्रदर्शन में सुधार के आधार पर उसे प्रचेष्टा-3 श्रेणी में शामिल किया गया है. इस श्रेणी में देश के कई अग्रणी राज्यों की मौजूदगी के बीच उत्तराखंड की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. रिपोर्ट में राज्य के प्रदर्शन का आकलन छह प्रमुख डोमेन और 72 सूचकांकों के आधार पर किया गया. इन सभी क्षेत्रों में उत्तराखंड ने कुल 584.5 अंक अर्जित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 58.2 अंक अधिक हैं. इससे साफ है कि विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए प्रयासों का असर अब राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में दिखाई देने लगा है.

राज्य का सबसे बेहतर प्रदर्शन समानता एवं समावेशन के क्षेत्र में दर्ज किया गया. इस श्रेणी में उत्तराखंड को 260 में से 222.2 अंक मिले हैं. यह संकेत देता है कि शिक्षा व्यवस्था को समावेशी बनाने और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास प्रभावी रहे हैं. विशेष रूप से पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों तक शिक्षा सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है.गवर्नेंस प्रोसेसेज के क्षेत्र में भी राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है. इस श्रेणी में उत्तराखंड को 78.5 अंक प्राप्त हुए हैं. इसे शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार का संकेत माना जा रहा है. विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग और डाटा प्रबंधन को मजबूत किए जाने का असर भी इस प्रदर्शन में दिखाई दिया है.

विद्यालयों तक पहुंच और नामांकन से जुड़े एक्सेस डोमेन में उत्तराखंड को 80 में से 64.7 अंक मिले हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में विद्यालयों की उपलब्धता, विद्यार्थियों का नामांकन और शिक्षा तक पहुंच बेहतर हुई है. दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यालयी सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत व्यवस्थाओं में सुधार को इसके पीछे अहम कारण माना जा रहा है.आधारभूत संरचना के क्षेत्र में राज्य को 84.9 अंक प्राप्त हुए हैं. इसमें स्कूल भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली और डिजिटल संसाधनों जैसी सुविधाओं का मूल्यांकन किया गया. वहीं शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में राज्य ने 66.8 अंक हासिल किए हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर विभाग का फोकस लगातार बढ़ा है. लर्निंग आउटकम्स यानी विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के क्षेत्र में राज्य को 67.4 अंक मिले हैं. हालांकि इस क्षेत्र में अभी और सुधार की आवश्यकता मानी जा रही है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में इसमें भी प्रगति दर्ज की गई है.

शिक्षा विभाग अब डिजिटल शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है, ताकि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और परिणामों में और सुधार किया जा सके. पीजीआई रैंकिंग में सुधार को राज्य में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार, तकनीक के उपयोग, समावेशी शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट क्लास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और डाटा आधारित मॉनिटरिंग पर विशेष फोकस किया है.

शिक्षा विभाग अब अगले चरण में आधारभूत संरचना और लर्निंग आउटकम्स जैसे क्षेत्रों में और सुधार की रणनीति पर काम कर रहा है. इसके तहत विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न शैक्षिक पोर्टलों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है.

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