25 July 2026

फिर सवालों को घेरे में बीकेटीसी, उपाध्यक्ष की पत्नी को दिखाया चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी, समिति ने दिया जवाब

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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की धार्मिक व्यवस्थाओं से जुड़ी प्रतिष्ठित संस्था बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है. इस बार मामला सीधे समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरवाण से जुड़ा है, जिन पर अपनी पत्नी को कार्यालय में चपरासी (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) दर्शाकर वेतन लेने के गंभीर आरोप लगे हैं. यह पूरा मामला सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आया है, जिसने समिति की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी की तरफ से दायर आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि उपाध्यक्ष ने अपनी पत्नी के नाम पर लगभग ₹12,000 प्रतिमाह का भुगतान समिति से लिया. यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल पद के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आएगा.

मामला यहीं तक सीमित नहीं है. विकेश नेगी ने यह भी आरोप लगाया है कि उपाध्यक्ष को देहरादून स्थित बीकेटीसी कार्यालय में कक्ष आवंटित होने के बावजूद, उन्होंने रुद्रप्रयाग में निजी आवास व कार्यालय दर्शाकर करीब ₹25,000 प्रतिमाह भत्ते के रूप में प्राप्त किए, जबकि समिति का मुख्यालय जोशीमठ में और कैंप कार्यालय देहरादून में संचालित होता है. ऐसे में रुद्रप्रयाग में कार्यालय किराया और अन्य मदों के नाम पर भुगतान लेना गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करता है.

इन आरोपों के सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. लोग यह जानना चाहते हैं कि आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ी संस्था में यदि इस तरह के आरोप लगते हैं, तो जवाबदेही किसकी होगी?

उन्होंने पूरे मामले को उनकी छवि खराब करने की साजिश करार दिया. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा या फिर जांच के जरिए सच्चाई सामने आएगी? धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठे इस विवाद ने न केवल बीकेटीसी बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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