27 July 2026

बागेश्वर के भद्रकाली मंदिर में आज भी चंद राजवंश की व्यवस्था, गुफा में छीपे हैं कई रहस्य, जानें पौराणिक कथाएं

0
oplus_2097184

बागेश्वर: उत्तराखंड को देवों की भूमि भी कहा जाता है. यहां कण-कण में देवी देवता निवास करते हैं. लोग अपने-अपने कुल देवता, वन देवता और ग्राम देवता की पूजा करते हैं. इसके अलावा, उत्तराखंड में 9 सिद्धपीठ और 3 शक्तिपीठ हैं, जिनके दर्शन के लिए दुनिया से लोग पहुंचते हैं. कई मंदिर ऐसे भी हैं, जो अपनी पौराणिक कथाओं के लिए प्रचलित हैं. ऐसा ही एक बागेश्वर का भद्रकाली मंदिर भी है.

मां भद्रकाली का मंदिर बागेश्वर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर कांडा तहसील में मौजूद है. मंदिर के चारों तरफ धौलीनाग, फैणीनाग, बेरीनाग, वासुकी नाग देवताओं के मंदिर हैं. भद्रकाली मंदिर के पास से भद्र नदी निकलती है, जो मंदिर परिसर से 300 मीटर नीचे से प्रवाहित होती. इसीलिए इस मंदिर का नाम भद्रकाली मंदिर पड़ा है.

भद्रकाली मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर गुफा में है. मंदिर के गुफा में एक कुंड भी बना है. मान्यता है कि इसमें स्नान करने से दैवीय भौतिक बाधाओं का निवारण होता. कुंड के पास मां का चरण स्थान माना जाता. जहां मां के चरणों की पूजा की जाती है. श्रद्धालुओं की मंदिर के प्रति अटूट आस्था है. इसलिए दूर-दूर से भक्त पूजा अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं.

मंदिर के पुजारी शेखर जोशी ने बताया कि, मां भद्रकाली की पूजा सरस्वती, लक्ष्मी और मां काली के स्वरूप में की जाती है. मां भद्राकाली को ब्रहमचारिणी के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्रों के दौरान भद्रकाली मंदिर में भारी भीड़ रहती है. महिलाएं हाथ में दीप जलाकर आराधना करती हैं.

कैसे पहुंचे मंदिर: भद्रकाली मंदिर कांडा पड़ाव में मौजूद है. कांडा पड़ाव से बागेश्वर मुख्यालय की दूरी 27 किमी है. जबकि पड़ाव से भद्रकाली मंदिर की दूरी 25 किमी है. पड़ाव से रावतसेरा मोटर मार्ग में धपोलासेरा, सानिउडियार से आगे भद्रकाली मंदिर है. मंदिर तक मोटर मार्ग है. दर्शन के लिए मंदिर तक वाहन से पहुंचा जा सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from उत्तराखंड DISCOVERY

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading