17 August 2026

बारिश में टपकती छत, दरारों वाली दीवारों के नीचे डर में ‘जिंदगी’, योजनाओं से दूर अफसाना का परिवार

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रुड़की: सरकार भले ही गरीबों को पक्की छत देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन हरिद्वार जिले के मंगलौर कस्बे की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती हुई नजर आ रही है. दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अधिकारियों की बैठकों में विकास के दावे किए जाते हैं. लेकिन असल जरूरतमंद आज भी बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं और योजनाएं कागजों में चमक रही हैं. यहां गरीब परिवार टूटी दीवारों और टपकती छतों के नीचे अपनी जिंदगी काट रहे हैं.

दरअसल, उत्तराखंड में हरिद्वार जिले के मंगलौर में अफसाना का मजदूर परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर है. दिनभर मजदूरी कर किसी तरह बच्चों का पेट पालने वाला यह परिवार आज भी सरकारी मदद का इंतजार कर रहा है. घर की हालत इतनी खराब है कि बरसात शुरू होते ही पूरा परिवार दहशत में आ जाता है और कच्ची छत से पानी टपकता है. दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और हर समय हादसे का डर बना रहता है. मासूम बच्चे पूरी रात जागकर बिताने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि बारिश का पानी घर के अंदर भर जाता है.

सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार की स्वच्छता आवास योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद इस परिवार को आज तक शौचालय तक नसीब नहीं हुआ है. परिवार के लोग कच्चे शौचालय और असुरक्षित हालात में जीवन बिताने को मजबूर हैं. कई बार नगर पालिका और संबंधित विभागों के चक्कर लगाने के बावजूद भी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है. लेकिन किसी अधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया.

अफसाना का कहना है कि, मैंने फॉर्म भरकर नगर पालिका में दिया था. लेकिन उन्होंने कुछ आपत्ति के बाद फॉर्म वापस कर दिया. इसके बाद दोबारा फॉर्म भरकर पालिका में दिया गया. लेकिन तब कैंसिल कर दिया गया. इसके बाद कुछ न कुछ खामियां बताकर मामले को रोका गया है. सरकारी विभाग में सुनवाई नहीं हो रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं का लाभ अपात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, उन्हें योजनाओं का फायदा मिल रहा है. जबकि वास्तव में गरीब और जरूरतमंद परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी कई इलाकों में सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है.

वहीं, इस गरीब मजदूर परिवार का दर्द अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकार की योजनाओं का लाभ उन लोगों तक कब पहुंचेगा, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं.

मंगलौर नगर पालिका के चेयरमैन मोहियुद्दीन अंसारी का कहना है कि

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए कुछ सरकारी कागजात होते हैं, जो पूरे करने पड़ते हैं. जिन मकानों को पहले मंजूरी मिली थी, वह हाउस टैक्स की रसीद से ही हो गए थे. लेकिन अब सरकार ने हाउस टैक्स की रसीद को मना कर दिया है, जिससे कि लोगों को परेशानियां हो रही हैं.अब मकान का रजिस्टर्ड बैनामा या फिर वसीयत या अन्य ऐसे दस्तावेजों (जो मकान स्वामी के नाम पर हो) के आधार पर जरूरतमंद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले सकेंगे. हालांकि, बोर्ड बैठक के दौरान प्रस्ताव पास किया गया है कि हाउस टैक्स की रसीद से ही मकान पास किए जाएं और यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. अगर शासन से मंजूरी मिलती है तो लोगों की ये समस्या खत्म हो जाएगी.

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