27 July 2026

बैंक अतिरिक्त धनराशि जमा करने का बना रहा था दबाव, देहरादून डीएम ने बुजुर्ग विधवा को दिलाया न्याय

0

देहरादून: राजधानी में एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा एक बुजुर्ग विधवा और उनकी नॉमिनी असहाय बेटी को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने और बीमित ऋण पर क्लेम प्राप्त होने के बावजूद अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के मामले में जिलाधिकारी ने पीड़िता को न्याय दिलाया. जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए बैंक की 3.30 लाख की आरसी काटी. इसके बाद बैंक ने 24 घंटे के भीतर 3.30 लाख रुपए का चेक नॉमिनी बेटी के नाम जारी कर दिया.

ऋण क्लेम की राशि जमा करने के बावजूद नहीं दिया नो ड्यूज सर्टिफिकेट: बता दें कि पिछले दिनों जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में प्रीति सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके पिता स्वर्गीय राजेन्द्र पाल ने साल 2023 में राष्ट्रीयकृत बैंक से 13 लाख रुपए का ऋण लिया था. बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के कहने पर ऋण को सुरक्षित करने के लिए इसका बीमा कराया गया. साल 2023 से अप्रैल 2025 तक उनके पिता ने 22,295 रुपये प्रतिमाह की नियमित किस्तें जमा कीं. अप्रैल 2025 में उनके पिता का निधन हो गया.

330,980 रुपये अतिरिक्त जमा कराने का बना रहे थे दबाव: पिता के निधन की सूचना तत्काल बैंक और बीमा कंपनी को दे दी गई. जून 2025 में बीमा कंपनी द्वारा ऋण क्लेम की राशि बैंक में जमा कर दी गई. इसके बावजूद बैंक द्वारा न तो नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा था, बल्कि प्रीति सिंह पर 330,980 रुपये अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा था. इस दौरान संपत्ति को जबरन जब्त करने की धमकी दी जा रही थी.

शिकायत के बाद डीएम ने किया न्याय: जिलाधिकारी सविन बंसल ने हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित कमलेश की शिकायत सुनने के बाद मामले को गंभीरता से लिया. सीडीएम (न्याय) कुमकुम जोशी को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए. जिला प्रशासन द्वारा जांच में पाया गया कि बीमा क्लेम राशि प्राप्त होने के बाद भी बैंक द्वारा अनुचित रूप से धनराशि की मांग की जा रही थी.

बैंक की आरसी काटी तो जारी किया चेक: इस पर बैंक की 330,980 रुपये की आरसी काटी गई. साथ ही आरसी कटते ही बैंक ने 24 घंटे के भीतर नॉमिनी प्रीति सिंह के नाम 3.30 लाख रुपए का चेक जारी कर दिया, जिसे शुक्रवार को जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा प्रीति सिंह को सौंप दिया गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from उत्तराखंड DISCOVERY

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading