27 July 2026

शांतिकुंज शताब्दी समारोह में साधकों का जमावड़ा, VVIP गेस्ट ने बढ़ाई रौनक

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हरिद्वार: बैरागी कैंप में शांतिकुंज शताब्दी समारोह में रोजाना कई वीआईपी पहुंच रहे हैं. बुधवार को योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने भी शताब्दी समारोह में शिरकत की. इस दौरान शांतिकुंज के साधकों ने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया.

शांतिकुंज प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या ने हजारों साधकों से नदी, तालाब और जंगल को स्वच्छ रखने की अपील की. बैरागी कैंप मैदान में आयोजित हो रहे शताब्दी समारोह में शांतिकुंज के हजारों साधकों का जमावड़ा लगा हुआ है. यहां पहुंचे योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा का राजनीतिक धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन अप्रतिम था. इसलिए आज शांतिकुंज के साधक ना सिर्फ गायत्री मंत्र को गाते हैं बल्कि उसे जीवन में आत्मसात करे हुए हैं.

शांतिकुंज प्रमुख डॉ चिन्मय पंड्या ने बताया पूज्य गुरुदेव की साधना के सौ वर्ष, पूज्य माता की जन्म शताब्दी और अखंड ज्योति दीपक के सौ वर्ष पूर्ण होने पर ही शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन संकल्प का आयोजन है. उन्होंने बताया आज पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया है. गृहमंत्री अमित शाह भी कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसलिए आगे समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प लिए जाएंगे. पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के तहत देशभर में शांतिकुंज के साधक भारत के 766 जिलों में वंदनीय माता जी के नाम से एक स्मृति उपवन की स्थापना और एक लाख से ज्यादा वृक्षारोपण किए जाएंगे. इसके साथ ही तीर्थ शुद्धि, जल शुद्धि, नदी और सरोवर शुद्धि के कार्य भी किए जाएंगे. इस कार्य में शांतिकुंज के देश विदेश के करोड़ों साधक सहयोग करेंगे. निश्चित रूप से आने वाले समय में उनका पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संकल्प अवश्य पूर्ण होगा.

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा शांतिकुंज के संस्थापकों ने जो तप और पुरुषार्थ किया है. वेद धर्म और गायत्री धर्म की प्रतिष्ठा के साथ चरित्र, राष्ट्र व युग निर्माण का संकल्प लिया है. उन्होंने युग बदलने और सुधरने का एकमात्र नारा ही नहीं दिया है, बल्कि जीवन में एक व्यावहारिक और सकारात्मक रूपांतरण किया है. उसी सनातन की शाश्वत परंपरा को डॉ प्रणव पंड्या और चिन्मय पंड्या आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं. किसी भी संगठन की सेवा और अनुष्ठान के सौ वर्ष पूर्ण होना बहुत बड़े गौरव की बात है. शांतिकुंज के संस्थापक पूज्य गुरुदेव ने 3400 ग्रन्थों की न सिर्फ रचना की है, बल्कि जन जन तक उन ग्रंथों के विचारों को भी पहुंचाने का कार्य किया है.

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