31 August 2025

साइबर अपराध बड़ी चुनौती , कैसे करें बचाव

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बढ़ती टेक्नालॉजी के साथ साथ साइबर अपराध और उसके तरीक़ों में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है जो कि पुलिस प्रशासन के लिए फ़िलहाल एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है अलग अलग तरीक़ों से साइबर अपराधी आपके साथ फ़्रॉड कर सकते हैं और आपको इस चीज़ की भनक तक नहीं लगेगी, ऐसा ही एक मामला देहरादून से सामने आया है जहाँ एक महिला के बैंक खाते से लगभग सात लाख का फ़्रॉड कर दिया गया, महिला का कहना है ना उसके द्वारा किसी प्रकार का कोई OTP किसी को दिया गया और न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक किया गया तो आख़िर उसके बैंक अकाउंट से इस तरह से 7 लाख रुपया ग़ायब हो गए , यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है अब एक दूसरे मामले पर नज़र डालते हैं जहाँ उत्तराखंड STF ने निवेश के नाम पर 44 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है यह शख्श लखनऊ का रहने वाला है और करंट अकाउंट के ज़रिए फ्रॉड करने के बाद सारा पैसा दो प्रतिशत की कमीशन के एवज़ में बाहरी देशों में ट्रांसफर कर दिया करता था S T F के अनुसार पिछले एक वर्ष से यह इस कार्य में संलिप्त था और टेलीग्राम के जैसी सोशल मीडिया एप्लिकेशंस के ज़रिये भी बाहरी देशों में बैठे हुए साइबर अपराधियों के संपर्क में था STF द्वारा इस साइबर अपराध का पर्दाफ़ाश कर दो प्रतिशत के आरोपी को तो गिरफ़्तार कर लिया गया लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस आरोपी के पास से आधार कार्ड , सिम कार्ड मोबाइल और चेकबुक के अलावा कुछ और रिकवर नहीं किया जा सका ,हाँ एक अकाउंट ज़रूर STF ने फ़्रीज़ किया है जिसमें कि 54, हज़ार रुपय बताये जा रहे लेकिन अब सवाल यह है कि क्या 44 लाख रुपय की धोखा धड़ी करने वाले शख़्स सेक्यों मात्र 54, हज़ार की रिकवरी की जाएगी

अब इन दोनों मामलों पर यदि ग़ौर किया जाए तो एक बात आपको सामान्य लगेगी

“ पेंसों की रिकवरी “

ग़ौरतलब है कि इस तरह के साइबर अपराध पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं साइबर अपराधी फ़्रॉड किए गए पैसों को क्रिप्टो और हवाल के ज़रिए बाहरी देशों में ट्रांसफर कर देते हैं जिसके बाद पैसों की रिकवरी लगभग नामुमकिन मानी जा सकती है फ़िलहाल साइबर पुलिस के पास ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं है जिस से कि बाहरी देशों में ट्रांसफर किए गए पैसों को किसी तरह से रिकवर किया जाए 1903 और 1933 ऐसे टोल फ़्री नंबर है जिनके ज़रिए आप अपने साथ घटित साइबर अपराध की जानकारी जल्द से जल्द साइबर पुलिस तक पहुँचा सकते हैं लेकिन जिस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं उसको फ्रीज़ करने में भी साइबर पुलिस को 20 मिनट का वक़्त लगता है

SSP, S T F नवनीत भुल्लर ने जानकारी देते हुए बताया कि जागरूकता ही इस तरह के अपराधों से बचने का उपाय है और ऑनलाइन किसी भी तरह के प्रलोभन में आकर यदि आप साइबर अपराधियों की बातों में आते हैँ हाँ तो इस तरह के साइबर अपराधों के मामले लगातार बढ़ते जाएंगे

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