28 July 2026

स्यानाचट्टी में इन दो गदेरों का ट्रीटमेंट जरूरी, भविष्य में फिर पैदा कर सकते हैं खतरा!

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उत्तरकाशी: स्यानाचट्टी में यमुना नदी में झील बनने और उसके तल पर मलबा जमा होने की मुख्य वजह कुपड़ा खड्ड एवं डडोटी खड्ड से आया सैलाब है. इन दोनों खड्ड (गदेरा) ने यमुना नदी का प्रवाह रोक दिया था, जिससे वहां पर झील बन गई थी. जिसकी वजह से कई दुकानें, होटल आदि झील में समा गए.

फिलहाल, झील को पंचर करने के साथ ही नदी को चैनेलाइज करने का काम किया जा रहा है, लेकिन समय रहते ही समस्या खड़ी करने वाले कुपडा और डडोटी खड्ड (गढ़गाड़) का स्थायी ट्रीटमेंट नहीं किया गया तो यह खड्ड भविष्य में स्यानाचट्टी कस्बे के अस्तित्व के लिए नासूर बन सकते हैं.

उत्तरकाशी जिले की यमुनाघाटी के बड़कोट तहसील के स्यानाचट्टी कस्बे के ठीक पीछे घने जंगल की पहाड़ी से दोनों ओर से करीब 300-300 मीटर लंबे दो खड्ड कुपड़ा खड्ड और डडोटी खड्ड निकल रहे हैं, जो स्यानाचट्टी के लिए नासूर बने हुए हैं. बीती 28 जून की रात से इन घने जंगल की पहाड़ियों से रुक-रुक कर मलबा, बोल्डर, पत्थरों के साथ हरे पेड़ कुपड़ा खड्ड में बह कर आए.

इसकी वजह से स्यानाचट्टी में करीब 500 मीटर लंबे और करीब 200-250 मीटर चौड़े आकार में मलबा यमुना नदी में जमा हो गया. ऐसे में नदी का तल करीबन 25 से 30 फीट तक ऊपर उठ गया. इस बीच बारिश होते ही यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से वहां झील बन गई. झील बनने से आवासीय मकान, होटल, दुकानों और स्कूल के साथ यमुनोत्री हाईवे का मोटर पुल जलमग्न हो गया.

स्थानीय प्रेम सिंह राणाभगत सिंहमनमोहन राणाजयपाल सिंह समेत जानकारों का कहना है कि इन दोनों खड्डों (गदेरों) का समय रहते हुए दीर्घकालिक ट्रीटमेंट कार्य नहीं किया गया, तो मानसून के दौरान फिर से इस तरह की समस्या पैदा हो सकती है. जिससे स्यानाचट्टी के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो सकता है. इसके साथ ही अगर फिर से कोई झील बनती है तो खरादी से लेकर नौगांव कस्बे तक बड़ी तबाही होने से इनकार नहीं किया जा सकता है.

झील बनने से क्या हुआ था? बीती 28 जून को यमुना नदी पर हल्की झील बनी. जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई थी, लेकिन लगातार बारिश के चलते 21 अगस्त को फिर से झील बन गई. इस बार झील का जलस्तर काफी बढ़ गया, जिससे आस पास के भवन, दुकानें, होटल और स्कूल में पानी घुस गया.

झील बनने से यमुनोत्री हाईवे पर बना मोटर पुल भी डूब गया. हालांकि, इस स्थान पर सिंचाई विभाग की 3 पोकलैंड जेसीबी मशीनें काम कर रही थी, लेकिन वो झील के मुहाने तक नहीं पहुंच पा रही थी. स्थिति की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने आनन-फानन में स्यानाचट्टी से सभी भवनों एवं होटलों को खाली करवा दिया.

वहीं, सिंचाई विभाग की मशीनें झील के मुहाने पर पहुंची और मलबा हटाने का काम शुरू किया. जिससे स्थिति सामान्य हो पाई. बीते 27 अगस्त को सीएम पुष्कर धामी ने स्यानाचट्टी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया. उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया. सीएम ने डीएम प्रशांत आर्या को जलभराव और मलबा आने से लोगों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा है.

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