हल्द्वानी शुद्धिकरण मामला, देहरादून में बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा, हरिद्वार में एक मंच पर दिखे धुर विरोधी नेता
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देहरादून: राजधानी देहरादून में आज हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले को लेकर भारी सियासी घमासान देखने को मिला. एक तरफ जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने गांधी पार्क में एकजुट होकर कांग्रेस के खिलाफ हुंकार भरी और पलटवार किया.
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है. इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि कुछ हफ़्ते पुरानी है, जब हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित किया था.
11 अगस्त को किया गया था मंच का शुद्धिकरण: इस रैली के संपन्न होने के चौथे दिन यानी 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्याय के कार्यकर्ताओं ने मंच और मैदान का गंगाजल से छिड़काव व हवन कर कथित रूप से शुद्धिकरण किया था. कांग्रेस ने इस पूरी घटना को मल्लिकार्जुन खड़गे की दलित पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए भाजपा और संघ समर्थित संगठनों पर छुआछूत, सामाजिक भेदभाव और अपमान करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए.
कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा: कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि दलित समाज से आने वाले उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच को इस तरह धोना और शुद्धिकरण करना सनातन धर्म की आड़ में दलित समाज का सीधा अपमान है. हालांकि बीजेपी ने इससे साफ इंकार किया था. बीजेपी ने साफ किया था कि जिस संगठन ने हल्द्वानी रामलीला मैदान के मंच का शुद्धिकरण किया, उनका उनकी पार्टी से कोई संबंध नहीं है.
बीजेपी ने दिया था जवाब: साथ ही बीजेपी ने यहां तक कहा था कि हल्द्वानी रामलीला मैदान का शुद्धिकरण किसी जातिगत द्वेष के तहत नहीं किया गया था. भाजपा का दावा है कि रैली के दौरान मंच पर कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे और बयानबाजी हुई थी. साथ ही मैदान में फैली गंदगी की सफाई के उद्देश्य से वहां हवन-पूजन किया गया था, जिसमें खुद वाल्मीकि समाज के लोग भी शामिल थे, लेकिन राजनीतिक रूप से यह मुद्दा सुलझने के बजाय लगातार गरमाता चला गया.
29 अगस्त को राहुल गांधी ने की थी प्रेस वार्ता: इस मामले को जहां खुद मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने खुद लोकसभा व राज्यसभा में उठाया तो वहीं 29 अगस्त को राहुल गांधी ने भी इस मामले में दिल्ली में प्रेस वार्ता की थी. राहुल गांधी ने हल्द्वानी रामलीला मैदान शुद्धिकरण को छुआछूत और दलितों से अपमान से जोड़ा. इसके बाद तो मामला राष्ट्रीय मुद्दा बना गया. वहीं राहुल गांधी की प्रेस वार्ता के बाद तीस अगस्त को अमित नाम के व्यक्ति ने राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में तहरीर दी है.
राहुल गांधी पर दर्ज हुआ मुकदमा: अमित ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर अनुसूचित जनजाति की भावनाओं की ठेस पहुंचाया. इसी तहरीर पर हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. तभी से कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. कांग्रेस का आरोप है कि उन्होंने भी प्रदेशभर के थानों में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी तहरीर पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. हालांकि कांग्रेस की तरफ से कर्नाटक से बेंगलुरु बीजेपी के कुछ नेताओं पर जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई है. इसके बाद से ही दोनों पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं.
दोनों पार्टियों किया शक्ति प्रदर्शन: इसी मामले को लेकर आज राजधानी देहरादून में सड़कों पर राजनीतिक घमासान का चरम रूप देखने को मिला. एक ओर जहां उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर प्रदेश भर से जुटे हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए रैली निकाली. वहीं कांग्रेस के इस प्रदर्शन के जवाब में आज भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी ताकत का भरपूर अहसास कराया.
देहरादून के ऐतिहासिक गांधी पार्क में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में एक विशाल विरोध प्रदर्शन और धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों, विधायकों, मंत्रियों और हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
बीजेपी का आरोप: गांधी पार्क में आयोजित इस सभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर पलटवार किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस एक गैर-मुद्दे को तूल देकर राज्य का सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रही है. भाजपा वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से दलित समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती आई है और अब चुनाव नजदीक आते देख समाज को जातियों में बांटकर राजनीतिक रोटियां सेकने की साजिश रच रही है.
भाजपा नेताओं ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में सर्वसमाज का सम्मान सुरक्षित है और पार्टी समाज को बांटने वाली किसी भी ताकत को अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने देगी. दोनों ही प्रमुख दलों के आमने-सामने आने और सड़कों पर उतरने से दिनभर देहरादून का प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा और पूरा शहर राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र बना रहा. उत्तराखंड देवभूमि है और यहां गंगा, यमुना और बद्री केदार जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं. कांग्रेस देवभूमि उत्तराखंड को कलंकित करने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए अब जातिगत राजनीति पर उतारू हो गई है. हल्द्वानी में जो कुछ भी हुआ है, भाजपा उसे अपने आप को अलग करती है. हल्द्वानी में रामलीला के मंच पर गंदगी, शराब की बोतले और अन्य गंदगी फैलाई गई थी. यदि किसी संस्था के द्वारा महा सफाई की गई तो उसमें कोई बुराई नहीं है. वहां पर धार्मिक नारे भी लगाए गए और उसके बाद साफ सफाई का कार्य हुआ, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का उसमें कोई लेना-देना नहीं है.
हरिद्वार में एक मंच पर दिखे धुर विरोधी नेता: देहरादून के अलावा हरिद्वार में भी बीजेपी विरोध प्रदर्शन किया. धरने में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मंत्री खजान दास समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए. धरने की सबसे खास तस्वीर लंबे समय बाद भाजपा के कई ऐसे नेताओं के एक मंच पर नजर आने की रही, जिन्हें पार्टी की आंतरिक राजनीति में एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता रहा है.
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता और दर्जाधारी ओमप्रकाश जमदग्नि एक साथ धरने में बैठे दिखाई दिए, जिस तरह से कांग्रेस इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, उसे देखते हुए इस एकजुटता को भी हरिद्वार भाजपा की राजनीति में अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. कुल मिलाकर पोस्टर पर भीमराव अंबेडकर का फोटो लगाया गया और हाथ में लिए हुए बैनरों में भी कांग्रेस को दलित विरोधी दर्शाया गया.कांग्रेस देश में वातावरण बनाकर सामाजिक समरसता को खराब करने का प्रयास किया है. अब उन्होंने उत्तराखंड में भी यही करना शुरू कर दिया है. उसी के विरोध में भाजपा ने धरना दिया है.धरने के माध्यम से कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता को उजागर करने का कार्य किया गया है. जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी झूठ और बरामद प्रचार करके इस प्रदेश का सामाजिक सोहर खराब करने का प्रयास कर रही है, उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उत्तराखंड में कभी भी धर्म और जाति के नाम पर सामाजिक बंटवारा कभी देखने को नहीं मिला लेकिन कांग्रेस यह प्रयास कर रही है। कांग्रेस को उसके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.
