उत्तराखंड में 17 मदरसों को किया गया सील, बिना मान्यता के चल रहे 107 मदरसे हुए बंद, सबसे ज्यादा हरिद्वार से

देहरादून: प्रदेश में निर्धारित मान्यता एवं शैक्षणिक मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है. प्रदेश में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है, जबकि तीन मदरसों के प्रबंधकों ने संचालन बंद किए जाने की लिखित सूचना दी है. इस प्रकार अब तक कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन बंद कराया गया है. वहीं सरकार की सख्ती के बाद कुल 107 मदरसे बंद हो चुके है, जिसमें से सबसे अधिक 102 मदरसे हरिद्वार जिले में बंद हुए है. वर्तमान समय में 100 से अधिक मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किए है.
जानिए कहां कितने मदरसे बंद हुए: उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार हरिद्वार जिले में कुल 269 मदरसे थे. इनमें से 102 मदरसे बंद हो चुके हैं. जबकि 76 मदरसों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है. इसके साथ ही 45 मदरसे शिक्षा विभाग में रजिस्टर्ड है और 46 मदरसों का अभी निरीक्षण किया जाना है. इसी तरह ऊधमसिंह नगर जिले में 119 मदरसे थे, जिसमें से अभी तक पांच मदरसे बंद हो चुके हैं.
वहीं नैनीताल जिले में 18 मदरसों में से 12 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है. इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले में एक और चंपावत जिले में दो मदरसे मौजूद है. वर्तमान समय तक 35 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिल चुकी है.
सीएम धामी के सख्त निर्देश: उत्तराखंड में एक जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू होने के बाद मदरसों के संचालन को लेकर सरकार सख्त नज़र आ रही है. इसी क्रम में सीएम धामी ने निर्देश दिए है कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों एवं मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा.
राज्य में लागू नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जाएगा. बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी.
30 जून को मदरसा बोर्ड समाप्त हो गया: उत्तराखंड राज्य में 30 जून 2026 को मदरसा बोर्ड समाप्त हो गया है, जिसके स्थान पर 1 जुलाई 2026 से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू हो गया है. ऐसे में मदरसों को संचालन के लिए शिक्षा विभाग से एफिलिएशन लेने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य है. वर्तमान समय में 100 से अधिक मदरसों में शिक्षा विभाग से एफिलिएशन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, जबकि अभी तक 35 मदरसों को शिक्षा विभाग से एफिलिएशन मिलने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिल चुकी है. ऐसे में जिन भी मदरसों ने आवेदन नहीं किया है, उनको बंद करने की कार्रवाई नियमानुसार चल रही है. इसके लिए जिला प्रशासन के साथ जिला अल्पसंख्यक अधिकारी की ओर से कार्रवाई की जा रही है.
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जो मदरसे बंद हुए है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को आसपास के स्कूलों या फिर पंजीकृत मदरसों में शिफ्ट करने के निर्देश जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को दिए गए है. ताकि किसी भी बच्चे की शिक्षा इस लीगल प्रक्रिया की वजह से बाधित न हो.
साथ ही बताया कि 35 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है और 100 से अधिक मदरसों ने आवेदन किया है. ऐसे में इन मदरसों को मान्यता मिलने के बाद बच्चों को इन मदरसों में शिक्षा का लाभ मिलेगा. साथ ही बताया कि प्रदेश में जो 6 अल्पसंख्यक समुदाय है, उनके शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए ही व्यवस्था की गई है. प्रदेश में जिन मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किए है, उसमें से करीब 100 से ज्यादा मदरसे बंद हो चुके है.
