27 July 2026

ONSGDC देवप्रयाग की बड़ी लापरवाही, BSc की पास छात्रा को किया फेल, स्कॉलरशिप भी रुकी, ऐसे हुआ खुलासा

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श्रीनगर: ओंकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय (ONSGDC) देवप्रयाग की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है. बीएससी अंतिम वर्ष की परीक्षा में जिस छात्रा को फेल घोषित कर दिया गया था, बाद में वो पास निकली. जानिए कैसे?

दरअसल, फेल होने पर छात्रा ने आरटीआई (RTI) के जरिए उत्तर पुस्तिका निकलवाई तो पता चला कि वह वास्तव में शानदार अंकों से उत्तीर्ण है. विश्वविद्यालय की इस चूक ने न केवल छात्रा का एक साल बर्बाद कर दिया, बल्कि उसे मिलने वाली छात्रवृत्ति और करियर के महत्वपूर्ण अवसरों से भी वंचित कर दिया.

स्वर्गीय राम सिंह चौहान की पुत्री सुनीता एक बेहद होनहार छात्रा रही है. उसने हाईस्कूल की परीक्षा 70 प्रतिशत और इंटरमीडिएट 65 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी. बीएससी के शुरुआती दो वर्षों में भी उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा और उसने औसतन 70 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. मई 2025 में बीएससी छठे सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद जब जुलाई 2026 में परिणाम आया, तो उसे जूलॉजी विषय के ‘डेवलपमेंटल बायोलॉजी ऑफ वर्टिब्रेट्स’ पेपर में फेल घोषित कर दिया गया.

इस अप्रत्याशित परिणाम से छात्रा गहरे मानसिक तनाव में चली गई. छात्रा ने हार न मानते हुए आरटीआई का सहारा लिया. अगस्त 2026 में पहली बार आवेदन करने पर जवाब नहीं मिला, लेकिन दिसंबर 2026 में पुनः प्रयास करने पर फरवरी 2026 में उसे उत्तर पुस्तिका प्राप्त हुई. चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस पेपर में उसे फेल किया गया था, उसमें उसने 75 में से 49 अंक (करीब 65%) प्राप्त किए थे.

विश्वविद्यालय की इस गंभीर त्रुटि के कारण सुनीता न केवल डीएलएड (D.El.Ed) की परीक्षा में बैठने से वंचित रह गई, बल्कि फेल घोषित होने के कारण उसकी स्नातक की छात्रवृत्ति भी रोक दी गई. आर्थिक और मानसिक नुकसान झेल रही सुनीता ने अब न्याय की गुहार लगाई है. उसकी मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल प्रभाव से उसके परीक्षा परिणाम को दुरुस्त करे, उसकी रुकी हुई छात्रवृत्ति का भुगतान कराया जाए और लापरवाही के कारण उसके करियर को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई की जाए. इस मामले ने विश्वविद्यालय की मूल्यांकन और डेटा फीडिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं. वहीं इस मामले पर प्राचार्य प्रो. नर्मदेश्वर शुक्ल का कहना है कि सुनीता आरटीआई से प्राप्त उत्तर पुस्तिका को प्रस्तुत करेगी तो इसे अग्रिम कारवाई के लिए विवि को भेज दिया जाएगा.

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