27 July 2026

अचानक घर में घुसा विशालकाय मगरमच्छ, चीखते हुए घर से बाहर भागा परिवार

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लक्सर: हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में मगरमच्छों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है. ताजा मामला खेड़ी कला गांव का है. जहां रविवार देर रात एक विशालकाय मगरमच्छ अचानक एक घर में घुस आया. अचानक मगरमच्छ को देख सभी सदस्य घर छोड़कर बाहर आ गए. मगरमच्छ के घुसने की सूचना पर पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया. वहीं, ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने मगरमच्छ का रेस्क्यू किया.

खेड़ी कला गांव में घर में मगरमच्छ घुसा तो चीखते हुए बाहर भागा परिवार: जानकारी के मुताबिक, 21 सितंबर की देर रात अचानक एक विशालकाय मगरमच्छ खेड़ी कला गांव में एक घर में घुस गया. जिसे देख परिवार के होश फाख्ता हो गए. परिवार के लोग चीखते हुए बाहर की तरफ भागे. चीख सुनकर मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई. मगरमच्छ को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस बीच इसकी सूचना वन विभाग को दी गई.

बता दें कि लक्सर क्षेत्र में मगरमच्छ के कारण लोग काफी दहशत में है. आए दिन लक्सर क्षेत्र के किसी न किसी जगह पर मगरमच्छ दिखाई दे रहे हैं. जिसके कारण लोगों काफी दहशत बनी हुई है. अभी 18 सितंबर की रात को लक्सर की कश्यप कॉलोनी में विशालकाय मगरमच्छ मिला तो वहीं 19 सितंबर के दिन में महाराजपुर गांव में मगरमच्छ का रेस्क्यू किया गया. इससे पहले भी कई गांव में मगरमच्छ पाए गए हैं.

आए दिन किसी न किसी ग्रामीण के घर में मगरमच्छ घुस आता है. गनीमत ये रही कि अभी तक किसी को हानि नहीं पहुंचाई. हां एक बार तो तालाब के किनारे पहुंचे ग्रामीण को मगरमच्छ ने अपना शिकार बनाने के लिए उस पर हमला कर दिया था. जिसमें ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके हाथ को मगरमच्छ ने पकड़ लिया था. ग्रामीण की सूझबूझ व आसपास के लोगों ने मगरमच्छ से उसे बचाया.

उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया. इसके अलावा मुंडा खेड़ा कला गांव समेत पूरे लक्सर व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में मगरमच्छ पाए जा रहे हैं. इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि लक्सर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जलीय जीव गंगा से निकलकर ग्रामीण क्षेत्र की ओर पहुंच रहे हैं. हालांकि, वन विभाग काफी सक्रिय है और लोगों को जागरूक भी कर रहा है. साथ लोगों की मदद करते हुए सूचना पर तत्काल पहुंचकर मगरमच्छों का रेस्क्यू कर उसे वास जगह पर छोड़ा जा रहा है.

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