27 July 2026

सेवन सिस्टर्स की तर्ज पर हो उत्तराखंड में परिसीमन, कांग्रेस ने उठाई मांग, प्वाइंट्स भी गिनाये

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देहरादून: संसद में पेश नारी शक्ति वंदन बिल के बाद अब उत्तराखंड में भी परिसीमन की चर्चाएं तेज होने लगी है. चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा से विधायक लखपत बुटोला ने कहा उत्तराखंड में परिसीमन नॉर्थ स्टेट सेवन सिस्टर की तर्ज पर होना चाहिए.

बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने कहा उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश है. वह सीमांत जनपद के विधायक हैं. हम अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए हैं. बदरीनाथ विधानसभा के निवासी देश की दूसरी रक्षा पंक्ति के लोग हैं. उन्होंने कहा 74 फीसदी भूभाग में इसी क्षेत्र का पानी देश को सिंचित करता है. देश को पानी पिलाता है. उनकी विधानसभा का क्षेत्रफल 4043 वर्ग किलोमीटर है. दिल्ली का क्षेत्रफल 1484 वर्ग किलोमीटर है.

इसी प्रकार हरिद्वार, उधम सिंह नगर के कुल क्षेत्रफल में 20 विधायक हैं. यह उनकी विधानसभा से कम का क्षेत्रफल है. लखपत बुटोला ने कहा विषम परिस्थितियों को लेकर यह राज्य बना था, 2007 में हमारा 58% प्रतिनिधित्व घटकर 48% पर आ गया है. यही परिस्थितियों रही तो प्रतिनिधित्व घटकर 28% पर आ जाएगा, तो पहाड़ की बात आखिर कौन करेगा?

लखपत बुटोला ने कहा संख्या बल पर स्थितियां नहीं बनेंगी तो फिर पहाड़ उसी स्थिति में चले आएगा जैसा पहले उत्तर प्रदेश के समय पर थी. इस मामले पर वह पहले ही विधानसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिख चुके हैं. उन्होंने कहा यह केंद्र का मामला है. उनकी इच्छा थी कि हम केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजें, ताकि उत्तराखंड में परिसीमन नॉर्थ स्टेट सेवन सिस्टर की तर्ज पर हो, जिससे हिमालय राज्य उत्तराखंड की मूल अवधारणा बची रहे. यहां जनसंख्या से ज्यादा क्षेत्रीय आधार को मानक बनाया जा सके.

लखपत बुटोला ने कहा परिसीमन जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि क्षेत्रफल के आधार पर होना चाहिए. उत्तराखंड राज्य दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगा हुआ प्रदेश है. रक्षा की दृष्टि से हम दूसरी पंक्ति के लोग हैं, लेकिन राज्य सरकार इस मामले पर सोई रही है.

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