₹2.82 करोड़ पाने के लिए भटक रहा परिवहन निगम, पीएम और गृह मंत्री के कार्यक्रमों से जुड़ा प्रकरण, जानें पूरा मामला
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देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम (उत्तराखंड रोडवेज) को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कार्यक्रमों के लिए लगाई गई कुल 554 बसों का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है. जिस कारण पहले से ही आर्थिक तंगहाली झेल रहे निगम और उसके कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने देहरादून के जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कुल 2 करोड़ 82 लाख 20 हजार 891 रुपए के लंबित भुगतान जारी करने की मांग की गई है. ताकि निगम के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जा सके.
दरअसल, उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष मुकेश नैथानी ने 16 जून 2026 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तत्काल भुगतान की मांग की थी. पत्र में जिक्र किया गया है कि 7 मार्च 2026 को आयोजित ‘जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम के लिए निगम की 299 बसें उपलब्ध कराई गई थीं. इन बसों के एवज में 1 करोड़ 44 लाख 2 हजार 431 रुपए का भुगतान पेंडिंग है. इसके अलावा, 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री के उत्तराखंड दौरे के लिए तमाम डिपो से 255 बसें लगाई गई थीं, जिनके लिए 1 करोड़ 38 लाख 18 हजार 460 रुपए का भुगतान अभी तक नहीं मिला है.
ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष मुकेश नैथानी ने कहा कि, लंबित भुगतान के लिए संबंधित विभागों को बिल पहले ही भिजवाए जा चुके हैं और मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय से भी भुगतान के निर्देश दिए गए थे, फिर भी राशि नहीं प्रदान की गई. पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि अप्रैल 2025 से कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिल रहा है, जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भुगतान सितंबर 2025 से लंबित है. इसके अलावा, डीजल, स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के परिचालन खर्च की देरी के चलते निगम के परिचालन में समस्या आ रही है.
यही नहीं, देहरादून कलेक्ट्रेट के प्रोटोकॉल अनुभाग ने भी 19 जून को शासन के प्रोटोकॉल विभाग को पत्र भेजकर इन बिलों की जानकारी दी थी. जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि 7 मार्च की 299 बसों के लिए 1.44 करोड़ रुपए और 14 अप्रैल की 255 बसों के लिए 1.38 करोड़ रुपए का भुगतान पेंडिंग है. इसके बावजूद, प्रोटोकॉल विभाग ने 7 जुलाई को जिलाधिकारी को भेजे गए जवाब में कहा कि, उत्तराखंड राज्य अतिथि नियमावली, संशोधित 2024 में ऐसे भुगतान का प्रावधान नहीं है. इसी आधार पर मूल प्रस्ताव की प्रति जिलाधिकारी कार्यालय को वापस भेज दी गई.
जिलाधिकारी कार्यालय ने भी मामले में शासन को पत्र लिखा था, लेकिन प्रोटोकॉल विभाग ने नियमावली के हवाले से भुगतान अस्वीकार कर दिया गया. परिषद ने जिलाधिकारी से अपील की है कि ये लंबित राशि प्राथमिकता के आधार पर जारी कराई जाए, ताकि कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्ति देयकों और निगम के दैनिक संचालन पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके. जबकि परिषद का कहना है कि अगर भुगतान जल्द नहीं हुआ तो कर्मचारियों की समस्याएं और बढ़ेंगी. इसके साथ ही किराए और ईंधन की बढ़ती लागत के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की नियमितता पर असर आ सकता है.
