5 August 2026

सचिवालय के कई अनुभाग चढ़ेंगे पहाड़, गैरसैंण पर फिर शुरू हुई बहस

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गैरसैण में महज दो दिन का सत्र आहूत होने पर नाराजगी जाहिर की और स्थाई राजधानी की आवाज को बुलंद किया

देहरादून: हाल ही में गैरसैंण सत्र के बाद फिर एक बार स्थाई राजधानी को लेकर बहस तेज हुई है. खासतौर पर राज्य आंदोलनकारियों और आम लोगों ने गैरसैण में महज दो दिन का सत्र आहूत होने पर नाराजगी जाहिर की और स्थाई राजधानी की आवाज को बुलंद किया. उधर इस बीच सचिवालय से आई खबर ने मामले में सभी का ध्यान खींचा. दरअसल, उत्तराखंड सचिवालय के करीब 11 अनुभागों को पहाड़ चढ़ाने का प्रयास किया गया है. इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस घोषणा से शुरू होती है, जिसमें उन्होंने सचिवालय कर्मचारियों को स्पष्ट करते हुए जल्द ही गैरसैंण में 11 अनुभाग शिफ्ट करने की बात कही.

उत्तराखंड सचिवालय संघ ने भी मुख्यमंत्री की इस घोषणा का स्वागत किया था. लेकिन घोषणा के बाद भी अब तक इस पर शासन स्तर से लिखित रूप में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है. इसी को देखते हुए अब सचिवालय संघ ने खुद मुख्यमंत्री की घोषणा को याद करते हुए इस मामले में जल्द फैसला लेने की मांग की है. उत्तराखंड सचिवालय संघ के महामंत्री राकेश जोशी बताते हैं कि सचिवालय संघ ने तमाम अनुभागों को गैरसैंण में शिफ्ट करने का स्वागत किया है, लेकिन वह तमाम सचिवालय के अधिकारियों से अब यह कहना चाहते हैं कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लिखित रूप में जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किया जाए ताकि इस पर जल्द से जल्द काम हो सके.

राज्य में गैरसैंण को लेकर समय-समय पर राजनीति होती रही है. नतीजा यह रहा कि चुनाव से ठीक पहले तमाम सरकारें भी इस पर कुछ ऐसे निर्णय लेती रही हैं, इसको लेकर बहस को आगे बढ़ाया है. इस मामले में विजय बहुगुणा सरकार ने पहली बार गैरसैंण में कैबिनेट आहूत की तो हरीश सरकार सरकार ने भी विधानसभा, सचिवालय के आधारभूत ढांचे को लेकर कदम बढ़ाया. उधर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने तो गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया. लेकिन इसके बाद भी स्थाई राजधानी को लेकर बहस जारी रही.

हाल ही में धामी सरकार ने गैरसैंण में सत्र आहूत करवाया और इस मुद्दे को फिर से तूल दे दिया. हालांकि मामले अब सचिवालय संघ के बयान ने फिर इस मामले पर नई बहस छेड़ दी है. राज्य आंदोलनकारी धामी सरकार के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि इस मामले में केवल घोषणा से ही काम नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसी व्यवस्था गैरसैंण में लागू भी करनी होगी ताकि कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी गैरसैंण में रहे और काम करें.

उत्तराखंड के इतिहास में यह पहली बार होगा जब गैरसैंण में अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजने के लिए सचिवालय के ही अनुभागों को शिफ्ट करने की बात कही गई हो. हालांकि इसका अनुपालन करना आसान नहीं होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि इस व्यवस्था के बाद न केवल तमाम कर्मचारी और अधिकारियों को गैरसैण में नौकरी करनी होगी बल्कि फाइल की मूवमेंट और तमाम काम भी गैरसैंण से ही करने होगें. यही नहीं जिन अनुभागों को गैरसैंण में शिफ्ट करना हो उसका चयन भी आसान नहीं होगा.

हालांकि इस व्यवस्था के साथ गैरसैंण जाने वाले अनुभागों के कर्मियों और अधिकारियों को अतिरिक्त भत्ता या प्रभारी के रूप में एक पद ऊपर की तैनाती दी जा सकती है, ताकि कर्मचारियों और अधिकारी गैरसैंण जाने के लिए प्रेरित हो, यही नहीं रोटेशन फार्मूले के जरिए भी व्यवस्था बनाई जा सकती है. इसके अलावा इसकी शुरुआत होने के बाद धीरे-धीरे बाकी अनुभागों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था पर काम किया जा सकता है.

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