उज्जैन महाकाल का मुकुट बनाने वाले तिलक की आदि कैलाश में मौत
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पिथौरागढ: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में पर आए मध्य प्रदेश के एक युवक की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. युवक को यात्रा के दौरान अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगी. उसे उपचार के लिए गुंजी स्थित पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया. घटना के बाद यात्रा पर आए अन्य साथियों में शोक की लहर है. मृतक युवक इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार में दुकान चलाता था और उज्जैन के महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट व श्रृंगार सामग्री तैयार करने का काम करता था.
मृतक की पहचान तिलक शर्मा (27 वर्षीय) पुत्र मनोज शर्मा, निवासी 24 शटर गली, नगर निगम रोड के निकट, इंदौर, के रूप में हुई है. बताया गया कि तिलक शर्मा अपने दोस्तों के साथ आदि कैलाश की यात्रा पर आया था. यात्रा के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी. साथियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे तत्काल गुंजी अस्पताल पहुंचाया, यहां चिकित्सकों ने उसका उपचार किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इसके बाद मृतक का शव धारचूला लाया गया, जहां उसे राजकीय चिकित्सालय में रखा गया है. पुलिस के अनुसार मृतक के शव का पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कराई जाएगी. इसके बाद शव अंतिम सुपुर्दगी के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा.
युवक 7 दोस्तों के साथ इस यात्रा पर आया था, आदि कैलाश रवाना होने से पहले इस दल ने नीम करोली बाबा, जागेश्वर और मुक्तेश्वर के दर्शन किए थे. नैनीताल घूमने के बाद वे आदि कैलाश पहुंचे थे, आदि कैलाश के दर्शन करके वापस लौटते समय अचानक तिलक शर्मा को सांस लेने में भारी परेशानी और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगी. दोस्तों के पास मौजूद ऑक्सीजन किट की मदद से उन्हें तुरंत ऑक्सीजन देने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्हें तुरंत गाड़ी से आर्मी बेस कैंप पहुंचाया गया, जहां रात करीब 8 बजे डॉक्टरों ने उन्हें इंजेक्शन और जरूरी दवाइयां दीं.
हालांकि, प्राथमिक इलाज के बाद भी जब स्वास्थ्य में कोई राहत नहीं मिली, तो उन्हें स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दूसरे बेस कैंप स्थित बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई और वहां ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने के महज 10-15 मिनट बाद ही तिलक शर्मा ने दम तोड़ दिया. तिलक शर्मा इंदौर के सराफा बाजार में अपनी दुकान संचालित करते थे और उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के लिए विशेष रूप से चांदी की श्रृंगार सामग्री बनाकर भेजते थे. उनके द्वारा मंदिर में इस्तेमाल होने वाले नेत्र, कान के आभूषण, टीका और छत्र जैसी पवित्र सामग्रियां बनाई जाती थीं. उनके सोशल मीडिया पेज पर भी महाकाल के लिए चांदी के मुकुट बनाते हुए कई वीडियो मौजूद हैं.
जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके बनाए मुकुट महाकाल मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाते हैं और उनसे भगवान का श्रृंगार किया जाता है. परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, तिलक अपने परिवार में इकलौते बेटे थे और उनके पिता भी उनके साथ ही इस काम में हाथ बंटाते थे. अगले साल होली के बाद उनकी शादी तय थी, लेकिन इस अचानक हुए हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है.
अब तक 3 श्रद्धालुओं की मौत: इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा पर आए 3 श्रद्धालुओं की अब तक मौत हो चुकी है. इससे पहले भी पीएम सुधीर नाम के एक श्रद्धालु की वापसी में धारचूला पहुंचने पर तबीयत बिगड़ गई थी. इसके कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया था. वहीं हाई एल्टीट्यूड में ऑक्सीजन की कमी के कारण हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है.
कहां है आदि कैलाश? आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है. ये पिथौरागढ़ जिले के धारचूला उपखंड में आता है. इसे छोटा कैलाश, शिव कैलाश, बाबा कैलाश या जोंगलिंगकोंग चोटी भी कहते हैं. आदि कैलाश की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 5,945 मीटर या 20,000 फीट है. यह स्थान तिब्बत के मुख्य कैलाश पर्वत की प्रतिकृति माना जाता है. ये भारत में ही स्थित है तो यहां जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं होती है. यहां सिर्फ इन लाइन परमिट जारी किया जाता है.
