उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार, बस संचालन न होने से यात्री परेशान
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देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी संघ ने अपनी कई लंबे समय से लंबित मांगों को मनवाने के लिए यह विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। इन मांगों में तीन महीने से रुकी हुई सैलरी का भुगतान, “समान काम के लिए समान वेतन” लागू करना और बसों की संख्या बढ़ाना शामिल है।
देहरादून के ISBT सहित राज्य भर के 20 डिपो में ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। इस आंदोलन के कारण लंबी दूरी की कई बसें डिपो में ही खड़ी हैं, जिससे यात्रियों को यात्रा के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। दिवाली का त्योहार नजदीक होने के कारण, रोडवेज कर्मचारियों के इस कार्य बहिष्कार से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: गौरतलब है कि दिवाली के बाद यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संघ ने आज से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारी राज्य के सभी डिपो में अलग-अलग जगहों पर धरने पर बैठे हैं। वहीं, देहरादून ISBT में सैकड़ों कर्मचारी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हैं और परिवहन विभाग तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
देहरादून आईएसबीटी से थमे बसों के पहिए: देहरादून आईएसबीटी में सुबह से ही रोडवेज के चालक-परिचालक काम बंद कर धरने पर बैठे हैं. बसों के पहिए थम गए हैं. लंबी दूरी की अधिकतर बसें डिपो में ही खड़ी हैं. यात्रियों को प्राइवेट वाहनों में मनमाना किराया देकर सफर करना पड़ रहा है. जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है. आईएसबीटी पर इंतजार कर रहे अरुण ने कहा कि,
क्या बोले रोडवेज यूनियन के पदाधिकारी? वहीं, उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उनकी मांगों में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि पिछले 3 महीने से परिवहन निगम के कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल पाई है. परिवहन निगम की वित्तीय हालत बिल्कुल खराब हो गई है, जिसके पीछे की मुख्य वजह यही है कि पिछले लंबे समय से नई बसों की खरीदारी नहीं हुई है.
इतना ही नहीं परिवहन निगम के लिए अधिकृत रूटों पर निजी बसों के संचालन के लिए निजी संचालकों को परमिट दे दिया गया है. जिस वजह से परिवहन निगम की आय लगातार कम होती जा रही है. साल 2022 के बाद से अभी तक परिवहन निगम को सालाना होने वाली आय में 25 फीसदी की कमी आई है. पहले रोजाना दो करोड़ रुपए की आय परिवहन निगम को होती थी, लेकिन अब ये घटकर डेढ़ करोड़ तक पहुंच गई है.
जिसके चलते 30 अक्टूबर से प्रदेश के 20 डिपो में कर बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दिया है. जिस वजह से परिवहन निगम का करीब 50 फीसदी काम बाधित हुआ है. ऐसे में अगर यह हड़ताल अगले दो दिनों तक जारी रहा, तो शत प्रतिशत परिवहन निगम का काम थप पड़ जाएगा. परिवहन निगम की रोजाना 1000 बसें संचालित होती हैं. जिसमें से 500 से 600 बसों का संचालन थम गया है. हालांकि, पर्वतीय मार्गों पर चलने वाले बसों को इस आंदोलन से दूर रखा गया है.
